Durg Opium Case
Durg Opium Case: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती के मामले ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जिस खेत में अफीम की फसल लहलहा रही थी, कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उसे कागजों पर ‘मक्के की फसल’ बताकर गुमराह करते रहे। इस गंभीर लापरवाही और संभवतः अपराधियों से मिलीभगत के खुलासे के बाद दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर ने 11 मार्च को तीन विभागीय अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इनमें ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू, फसल सर्वेयर शशिकांत साहू और ग्राम समोदा की पटवारी अनिता साहू के नाम शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एकता साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दस्तावेजों की गहन जांच में पाया गया कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू के कार्यों में भारी अनियमितताएं थीं। भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार के जिस खेत को ‘मक्का फसल प्रदर्शन प्लाट’ के रूप में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था, वहां वास्तव में धान की खेती हो रही थी। शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि हड़पने के लिए प्रदर्शन प्लाट का स्थान बदल दिया गया। नियम विरुद्ध तरीके से मक्के के खेत के पास किसी अन्य किसान को खड़ा करके फोटो खिंचवाई गई, जबकि सच्चाई यह थी कि उस कथित मक्के के खेत के ठीक पीछे अवैध अफीम की खेती फल-फूल रही थी। यह स्पष्ट रूप से शासन के साथ की गई एक बड़ी धोखाधड़ी है।
अफीम की इस अवैध खेती को छिपाने में डिजिटल सर्वेयर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। फसल सर्वेयर शशिकांत साहू ने सितंबर 2025 में खेत का डिजिटल सर्वे किया और सॉफ्टवेयर पर गलत फोटो गिरदावरी अपलोड की। उन्होंने खसरा नंबर 309 को खाली भूमि (पड़त) और खसरा नंबर 310 को धान की फसल बताया, जबकि हकीकत में इन दोनों ही खसरों पर अफीम उगाई जा रही थी। पटवारी अनिता साहू ने मौके पर जाकर सत्यापन करने के बजाय कार्यालय में बैठकर ही इस मनगढ़ंत रिपोर्ट को अप्रूव कर दिया, जिससे अफीम की खेती लंबे समय तक प्रशासन की नजरों से बची रही।
प्रशासनिक गलियारों में इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि इन तीनों अधिकारियों ने रसूखदार भाजपा नेता के साथ सांठगांठ कर इस अवैध कारोबार को संरक्षण दिया। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और अधिकारियों से 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। विभागीय जांच के घेरे में आए इन कर्मचारियों पर अब भ्रष्टाचार और अवैध मादक पदार्थों की खेती को बढ़ावा देने के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे ऐसे मामलों की जड़ तक जाएं और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद पूरे प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है।
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