Durg News
Durg News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ नगर निगम कमिश्नर के निजी सहायक (PA) की उग्र भीड़ ने बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना इतनी हिंसक थी कि मारपीट के दौरान कर्मचारी के कपड़े तक फट गए। यह पूरा विवाद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर धर्म विशेष को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से शुरू हुआ। जैसे ही यह खबर शहर में फैली, हिंदू संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा। 8 मई की सुबह बजरंग दल और अन्य संगठनों के दर्जनों कार्यकर्ता नगर निगम कार्यालय जा पहुंचे और आरोपी कर्मचारी को पकड़कर दफ्तर से बाहर घसीटते हुए ले आए। इस हंगामे के चलते निगम कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
पूरा मामला दुर्ग नगर निगम में प्लेसमेंट कर्मचारी के तौर पर कार्यरत गौतम साहू से जुड़ा है। गौतम साहू वर्तमान में निगम आयुक्त के निजी सहायक के रूप में काम कर रहा था। विवाद तब शुरू हुआ जब उसकी एक महिला सहकर्मी के साथ हुई निजी व्हाट्सएप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट सार्वजनिक हो गए। इन चैट्स में कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं और प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया था। बजरंग दल के जिला संयोजक सौरभ देवांगन के अनुसार, यह चैट 8 मई की सुबह हिंदू संगठनों के पास पहुंची, जिसके बाद कार्यकर्ताओं का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने सीधे कार्रवाई करने का फैसला किया।
दोपहर लगभग 1 बजे, आक्रोशित कार्यकर्ताओं की भीड़ नगर निगम परिसर में दाखिल हुई। कार्यकर्ताओं ने गौतम साहू को उसके केबिन से पकड़ा और बाहर निकालकर मारपीट शुरू कर दी। मौके पर मौजूद अन्य स्टाफ ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पदमनाभपुर थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल कर्मचारी को भीड़ से छुड़ाकर सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस उसे उपचार और पूछताछ के लिए थाने ले गई है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस के पहुंचने तक भीड़ काफी आक्रामक हो चुकी थी और स्थिति अनियंत्रित थी।
इस घटना के बाद बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने कानून का रुख किया है। पोलसाय पारा निवासी मंगल सिंह राजपूत ने पदमनाभपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना एक गंभीर अपराध है और ऐसे व्यक्ति को सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थान में काम करने का कोई अधिकार नहीं है। पुलिस ने आरोपी कर्मचारी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन सभी चैट्स और डिजिटल सबूतों को इकट्ठा कर रही है, जो इस विवाद का मुख्य कारण बने।
इस घटना ने नगर निगम जैसे संवेदनशील सरकारी कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिन-दहाड़े भीड़ का दफ्तर के अंदर घुसना और एक कर्मचारी के साथ मारपीट करना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। वहीं दूसरी ओर, कर्मचारियों के सोशल मीडिया आचरण पर भी बहस छिड़ गई है। निगम प्रशासन अब इस बात की आंतरिक जांच कर रहा है कि क्या कर्मचारी ने कार्यालय समय के दौरान ऐसी गतिविधियों को अंजाम दिया। फिलहाल, दुर्ग पुलिस ने स्थिति को शांत कर लिया है, लेकिन शहर में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त एहतियात बरती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून को हाथ में लेने वालों और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वालों, दोनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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