Durg temple theft: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मंदिरों से लगातार दानपेटियों की चोरी करने वाले 45 वर्षीय आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी, जो खुद को “भगवान से बदला लेने वाला” बताता है, ने कम से कम 10 मंदिरों से दानपेटियों का पैसा चुराया था। एचआईवी पॉजिटिव आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने अपना गुस्सा और निराशा ईश्वर के खिलाफ निकालने का फैसला किया था, जब 2012 में जेल में रहते हुए उसे यह संक्रमण हो गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने दुर्ग और उसके आसपास स्थित मंदिरों में कम से कम 10 चोरियां की हैं। उसकी चोरी करने का तरीका काफी योजनाबद्ध और समझदारी से भरा था। वह केवल नकद चुराता था और मंदिर के गहनों को नहीं छूता था। वह हर बार चोरी से पहले और बाद में अपने कपड़े बदलता था ताकि सीसीटीवी कैमरों में पहचान न हो सके। आरोपी अपनी स्कूटी से मंदिर के पास पार्क करता था, फिर चोरी करने के बाद उसी रास्ते से भाग निकलता था।
आखिरी चोरी 23 और 24 अगस्त 2025 की रात को हुई, जब आरोपी ने दुर्ग के बाहरी इलाके स्थित एक जैन मंदिर का ताला तोड़ा। चोरी के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और त्रिनयन ऐप के जरिए आरोपी की गतिविधियों का ट्रैक किया। पुलिस ने आरोपी के मूवमेंट को जोड़ते हुए उसे घेराबंदी करके पकड़ लिया और पूछताछ में उसने चोरी की बात मान ली। आरोपी के पास से ₹1,282 के सिक्के और उसकी जुपिटर स्कूटी भी बरामद की गई।
ताजा घटना के बाद दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने त्वरित जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की टीम ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मुखबिरों के माध्यम से आरोपी के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को उसके घर तक ट्रैक किया और गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अब तक नेवई, सुपेला, पद्मनाभपुर, भिलाई भट्ठी, और भिलाई नगर थाना क्षेत्रों के मंदिरों में चोरी की घटनाओं को कबूल किया है। हालांकि, पुलिस को शक है कि आरोपी ने और भी कई वारदातें की होंगी।
दुर्ग सिटी एसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी का मानना था कि उसकी जिंदगी नाहक बर्बाद हो गई थी। वह कहता था कि जेल में रहते हुए एचआईवी हो गया और उसे लगता था कि यह ईश्वर का खेल था। उसे लगता था कि उसने कोई गलती नहीं की, फिर भी वह संक्रमित हुआ। इस गुस्से में उसने फैसला किया कि वह मंदिरों में चढ़ाए गए पैसे को अपने जीवनयापन के लिए इस्तेमाल करेगा, और यही कारण था कि उसने लगातार मंदिरों को निशाना बनाया।
पुलिस ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की पूरी जांच की जा रही है। आरोपी के गिरफ्तारी के बाद मंदिरों के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि किस प्रकार किसी व्यक्ति का निराशा और गुस्सा उसे अपराध की ओर ले जा सकता है। हालांकि आरोपी का व्यक्तिगत कारण कुछ भी हो, लेकिन उसके द्वारा किए गए अपराधों ने समाज और मंदिरों के प्रति श्रद्धा को नुकसान पहुंचाया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह साबित होता है कि अपराधियों को चाहे जो भी हो, उन्हें कानून से बचने नहीं दिया जाएगा।
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