Reliance Group Loan Scam
Reliance Group Loan Scam : रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने 27 मार्च, 2026 को अनिल अंबानी के बेहद करीबी सहयोगी और RCom के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। 170 से अधिक पन्नों के इस कानूनी दस्तावेज में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर कच्चे चिट्ठे खोले गए हैं। इस कार्रवाई ने कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह मामला भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक माना जा रहा है।
ED द्वारा दाखिल चार्जशीट में पुनीत गर्ग पर बेहद संगीन आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि 2023 में जब RCom दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रही थी, तब गर्ग ने न्यूयॉर्क के पॉश इलाके मैनहट्टन में स्थित एक अपार्टमेंट को गुपचुप तरीके से 8.3 मिलियन डॉलर (लगभग 70 करोड़ रुपये) में बेच दिया। आरोप है कि इस बिक्री से प्राप्त धन को धोखे से दुबई की एक ऐसी कंपनी में डायवर्ट किया गया, जिसके तार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। यह ‘फंड डायवर्जन’ न केवल मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी जांच का विषय बन गया है।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया है कि बैंकों से कर्ज के रूप में लिए गए हजारों करोड़ रुपये को ठिकाने लगाने के लिए ‘लेयरिंग’ की जटिल तकनीक अपनाई गई। पुनीत गर्ग ने RCom की विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर संस्थाओं (Offshore entities) के एक जाल का उपयोग करके पैसों को कई स्तरों पर घुमाया। चार्जशीट के अनुसार, अपराध से हुई इस कमाई (Proceeds of Crime) का एक बड़ा हिस्सा गर्ग ने अपने निजी ऐशो-आराम और खर्चों के लिए इस्तेमाल किया। गौरतलब है कि गर्ग को इसी साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में जेल की सलाखें गिन रहे हैं।
इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में केवल पुनीत गर्ग ही नहीं, बल्कि अमेरिका में रहने वाली RCom की पूर्व कर्मचारी वैशाली जयराम माने को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस विशेष चार्जशीट में फिलहाल अनिल अंबानी का नाम बतौर आरोपी शामिल नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वे सुरक्षित हैं; ED पहले ही अनिल अंबानी और उनके बेटों से लंबी पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, अंबानी अभी भी जांच एजेंसी के रडार पर बने हुए हैं और भविष्य में उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
यह कार्रवाई अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के खिलाफ चल रही एक व्यापक जांच का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी रिलायंस पावर के खिलाफ 68 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एक विशेष जांच दल (SIT) अंबानी ग्रुप की विभिन्न कंपनियों की वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच कर रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, समूह की साख और भविष्य पर संकट के बादल और गहरे होते जा रहे हैं।
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