छत्तीसगढ़

Elephant Attack Raigarh : रायगढ़ में हाथियों का कहर: 5 साल की बच्ची को पटककर मार डाला, महिला की खेत में जान गई, ग्रामीण घर ढहने से मरा

Elephant Attack Raigarh : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों के हमले ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर सामने रख दी है। 22 जुलाई की रात को लैलूंगा रेंज के गोसाईडीह और मोहनपुर गांव में मादा हाथी और उसके शावक ने भारी उत्पात मचाया, जिसमें तीन ग्रामीणों की मौत हो गई।

मासूम पर टूटा कहर

घटना की शुरुआत गोसाईडीह गांव से हुई, जहां मादा हाथी ने 5 वर्षीय बच्ची पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाथी ने बच्ची को उठाकर कई बार ज़मीन पर पटका, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि बच्ची घर के पास ही खेल रही थी, तभी हाथी वहां आ धमका।

खेत में महिला बनी शिकार, मोहनपुर में दूसरी मौत

हाथियों का गुस्सा यहीं नहीं थमा। अगले गांव मोहनपुर में हाथी ने एक महिला पर हमला कर दिया। वह खेत में काम कर रही थी, तभी हाथी ने उसे सूंड से उठाकर पटक दिया, जिससे उसकी भी मौके पर मौत हो गई। आसपास के लोग जब तक कुछ समझ पाते, हाथी गांव के दूसरे हिस्सों में तबाही मचाने निकल चुका था।

घर गिराया, मलबे में दबकर गई तीसरी जान

हाथी ने मोहनपुर में ही एक कच्चे घर की दीवार को ढहा दिया। दुर्भाग्यवश उस समय एक ग्रामीण घर के अंदर था और मलबे में दबकर उसकी मौत हो गई। इसके अलावा कई अन्य घरों को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

वन विभाग की टीम मौके पर

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। टीम ने घटनास्थलों का निरीक्षण किया और हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। मृतकों के परिजनों को प्राथमिक सहायता और मुआवजा देने की प्रक्रिया भी जारी है।

हाथी-मानव संघर्ष बनता जा रहा स्थायी संकट

यह घटना छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष की एक और कड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन और पानी की कमी, वन क्षेत्रों में मानव अतिक्रमण और हाथियों के पारंपरिक मार्गों के बाधित होने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों की मांग: निगरानी और सुरक्षा के इंतज़ाम हों

दहशत में जी रहे गांववालों ने सरकार से मांग की है कि:

हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए कैमरे और ड्रोन लगाए जाएं

गांवों में रैपिड रेस्पॉन्स टीमें तैनात की जाएं

चेतावनी के लिए साउंड अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाए

मृतकों के परिवार को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए

एक दर्दनाक याद: मासूमों के सपने और घर उजड़ते गए

इस त्रासदी ने एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि जंगल और गांव के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि न हाथियों का गुस्सा उफान पर आए और न इंसानों की ज़िंदगियां यूं उजड़ें।

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