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Epstein Files Controversy: एप्सटीन फाइल्स विवाद, हरदीप पुरी का राहुल गांधी को जवाब, बताया ईमेल्स का पूरा सच

Epstein Files Controversy : दुनिया भर में चर्चित ‘एप्सटीन फाइल्स’ के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय राजनीति में भी भूचाल आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि इन विवादित फाइल्स में भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी शामिल है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद सदन में भारी शोर-शराबा हुआ और सत्ता पक्ष ने इसे निराधार करार दिया। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी दस्तावेजों और भारतीय नेताओं के बीच कथित संबंधों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

हरदीप सिंह पुरी का करारा पलटवार: “राहुल गांधी को तथ्यों की समझ नहीं”

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को आधारहीन आरोप लगाने की पुरानी आदत है। पुरी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी हैं जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को 10वें पायदान से चौथे पर पहुँचाया, और दूसरी तरफ एक ऐसे नेता हैं जो कभी-कभार ही देश में दिखते हैं और संसद में भाषण देकर भाग जाते हैं। उन्होंने राहुल गांधी के पुराने व्यवहारों, जैसे अध्यादेश फाड़ने और डिक्शनरी के शब्दों के गलत अर्थ निकालने का जिक्र करते हुए उन्हें “कॉमन सेंस” इस्तेमाल करने की सलाह दी।

एप्सटीन से मुलाकात का सच: “8 साल में केवल तीन बार हुई मुलाकात”

हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि एप्सटीन के साथ उनकी कोई व्यक्तिगत मित्रता या गुप्त संबंध नहीं था। उन्होंने बताया कि भारतीय विदेश सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद वे ‘इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट’ (IPI) में बतौर सेक्रेटरी जनरल कार्यरत थे। उस दौरान उनके बॉस एप्सटीन को जानते थे। पुरी ने स्वीकार किया कि 2009 के आसपास 8 वर्षों के लंबे कार्यकाल में उनकी एप्सटीन से केवल तीन बार मुलाकात हुई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये मुलाकातें पूरी तरह आधिकारिक और संस्थागत थीं, और उनका एप्सटीन के कुख्यात ‘निजी द्वीप’ (Epstein Island) से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा है।

ईमेल विवाद का खुलासा: “लिंक्डइन फाउंडर को लिखा था डिजिटल इंडिया पर मेल”

अपने नाम के फाइल में आने के तकनीकी कारण को समझाते हुए पुरी ने एक विशिष्ट ईमेल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर 2014 को उन्होंने लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन को एक व्यक्तिगत ईमेल भेजा था। इस ईमेल में उन्होंने भारत में बढ़ते डिजिटलीकरण और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की चर्चा करते हुए हॉफमैन को भारत आमंत्रित किया था। इस ईमेल की प्रति (CC) एप्सटीन को भी गई थी। पुरी ने कहा कि वे उस समय एक निजी नागरिक के तौर पर भारत के तकनीकी भविष्य को प्रमोट कर रहे थे, न कि किसी अनैतिक गतिविधि में शामिल थे।

एप्सटीन की नस्लभेदी टिप्पणी: “सांप और भारतीय दिखे तो भारतीय को मारो”

हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी को आइना दिखाते हुए उन ईमेल्स की अंदरूनी सच्चाई बताई। उन्होंने खुलासा किया कि उनके द्वारा भेजे गए मेल के जवाब में एप्सटीन ने रीड हॉफमैन को एक ईमेल लिखा था, जिसमें पुरी के प्रति नफरत और नस्लवाद साफ झलक रहा था। एप्सटीन ने पुरी को “दो चेहरों वाला व्यक्ति” कहा था और यहाँ तक लिखा था कि “अगर सामने सांप और भारतीय दिखे, तो पहले भारतीय को मारो।” पुरी ने कहा कि जो व्यक्ति भारतीयों से इतनी नफरत करता था, उसके साथ मेरा नाम जोड़ना राहुल गांधी की अज्ञानता को दर्शाता है। उन्होंने नसीहत दी कि आरोप लगाने से पहले कम से कम ईमेल्स को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

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