Epstein Files Out
Epstein Files Out: अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़ी जांच की नई फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम फिर से चर्चा में है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों के ताजा बैच ने कई पुराने राज खोल दिए हैं। हालांकि इन दस्तावेजों में ट्रंप पर सीधे तौर पर यौन शोषण का कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन एपस्टीन के साथ उनके पुराने संबंधों और यात्राओं के विवरण ने विपक्ष और मीडिया को सवाल उठाने का मौका दे दिया है। ट्रंप प्रशासन और न्याय विभाग ने इन दावों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया है।
न्याय विभाग द्वारा जारी की गई फाइलों में सबसे चौंकाने वाला विवरण जेफरी एपस्टीन के निजी जेट, जिसे ‘लोलिटा एक्सप्रेस’ (Lolita Express) के नाम से जाना जाता था, की उड़ानों से संबंधित है। दस्तावेजों के अनुसार, 1990 के दशक में डोनाल्ड ट्रंप ने इस विमान में कम से कम 7 बार यात्रा की थी। हालांकि, ट्रंप के समर्थकों का तर्क है कि उस समय एपस्टीन एक हाई-प्रोफाइल इन्वेस्टर के रूप में जाना जाता था और कई हस्तियां उसके साथ सामाजिक संबंधों में थीं। ट्रंप की टीम ने इन फ्लाइट रिकॉर्ड्स के आधार पर लगाए जा रहे कयासों को “झूठ का पुलिंदा” करार दिया है और स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति का इन गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था।
इन 29,000 पन्नों के दस्तावेजों में एक और महत्वपूर्ण सबूत सामने आया है। यह 2019 का एक हस्तलिखित पत्र (Handwritten Letter) है, जिसे एपस्टीन ने जेल के अंदर से एक अन्य दोषी यौन अपराधी लेरी नेसर को लिखा था। इस पत्र में एपस्टीन ने कथित तौर पर ‘हमारे राष्ट्रपति’ शब्द का उपयोग किया है और उनके युवा लड़कियों के प्रति रुझान या ‘लव अफेयर’ जैसी विवादास्पद बातें लिखी हैं। गौरतलब है कि यह पत्र उसी साल का है जब एपस्टीन की जेल की कोठरी में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस समय भी डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे, जिसके कारण यह पत्र अब और भी अधिक संदिग्ध और चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद बढ़ता देख अमेरिकी न्याय विभाग ने तुरंत इस पर स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने बताया कि इस जांच के तहत कुल 11,000 से ज्यादा फाइलें और दर्जनों वीडियो क्लिप जारी की गई हैं। विभाग ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि इन दस्तावेजों में शामिल कई दावे पूरी तरह निराधार हैं और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप असत्य हैं। न्याय विभाग के प्रवक्ताओं ने तर्क दिया कि यदि इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई होती या कोई कानूनी आधार होता, तो इन्हें बहुत पहले ही ट्रंप के खिलाफ अदालती कार्यवाही में इस्तेमाल कर लिया गया होता। उन्होंने जनता से इन फाइलों को केवल ऐतिहासिक जांच के संदर्भ में देखने की अपील की है।
इन दस्तावेजों का सार्वजनिक होना ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। आलोचकों का मानना है कि एपस्टीन जैसे अपराधी के साथ किसी भी प्रकार का संबंध राष्ट्रपति की छवि को धूमिल करता है। वहीं, ट्रंप के बचाव पक्ष का कहना है कि यह केवल उनके चरित्र हनन की एक और कोशिश है। 29,000 पन्नों के इन दस्तावेजों में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जिसकी जांच विशेषज्ञ कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये खुलासे किसी नई कानूनी मुसीबत का सबब बनते हैं या फिर पिछली बार की तरह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाते हैं।
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