Esmail Qaani spy charges: मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के सबसे रसूखदार सैन्य अधिकारियों में से एक, ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल कानी को लेकर आई खबरों ने अंतरराष्ट्रीय जगत में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया और खुफिया हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या सर्वोच्च नेता खामेनेई के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे कानी वास्तव में इजराइली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के लिए काम कर रहे थे? इन चौंकाने वाले दावों ने तेहरान के सुरक्षा गलियारों में सनसनी फैला दी है। अपुष्ट खबरों के अनुसार, कानी ने इजराइल को ऐसी गुप्त सूचनाएं दीं, जिससे ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को अपूरणीय क्षति हुई। फिलहाल, तेहरान ने इस मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, जिसने संदेह की आग में घी डालने का काम किया है।
सुलेमानी के उत्तराधिकारी पर अपनों का ही प्रहार
67 वर्षीय इस्माइल कानी ने साल 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद कुद्स फोर्स की कमान संभाली थी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) में दशकों का अनुभव रखने वाले कानी ने 1980 के ईरान-इराक युद्ध में भी वीरता दिखाई थी। लेकिन आज वही अनुभवी रणनीतिकार अपने ही देश की जांच एजेंसियों के घेरे में है। उन पर आरोप है कि उनके नेतृत्व में ईरान का खुफिया तंत्र इतना कमजोर हो गया कि इजराइल ने एक-एक कर ईरान के शीर्ष सहयोगियों को खत्म कर दिया। दशकों की वफादारी के बाद, कानी पर लगा ‘भेदिया’ होने का दाग ईरानी सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी माना जा रहा है।
सुरक्षा ढांचे की विफलता और बड़े नेताओं का पतन
कानी के कार्यकाल के दौरान ईरान समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ को सबसे गहरे जख्म मिले हैं। हमास के इस्माइल हनियेह और हिज्बुल्लाह के हसन नसरुल्लाह की हत्याओं के बाद, हाल ही में सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत ने ईरान के अस्तित्व पर संकट पैदा कर दिया है। इतनी बड़ी सुरक्षा चूक बिना किसी अंदरूनी मदद के संभव नहीं मानी जा रही है। इसी गद्दारी की तलाश में ईरान ने अपने सैन्य तंत्र के भीतर एक व्यापक ‘क्लीन-अप ऑपरेशन’ शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार, कानी और उनकी पूरी कोर टीम को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई है ताकि इजराइली सेंधमारी की गहराई का पता लगाया जा सके।
बार-बार हमलों में बचने से गहराया जासूसी का शक
सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों में सबसे बड़ा तर्क कानी का जीवित रहना है। दावा किया जा रहा है कि जिस भीषण हमले में खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए, उसमें कानी का सुरक्षित बच निकलना कोई इत्तेफाक नहीं था। पिछले दो वर्षों में ईरान और सीरिया में हुए दर्जनों सटीक हमलों में, जहां उनके साथी अधिकारी शहीद हुए, कानी हमेशा बाल-बाल बचते रहे। इन घटनाओं ने इस धारणा को बल दिया कि संभवतः इजराइल ने उन्हें अपनी संपदा (Asset) के रूप में सुरक्षित रखा था।
अपुष्ट सजा की खबरें और तेहरान की खामोशी
कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि इस्माइल कानी को जासूसी के दोष में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है और उसे गुप्त रूप से तामील भी कर दिया गया है। हालांकि, ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि न होना यह संकेत देता है कि सरकार अभी भी इस मामले को सुलझाने या सार्वजनिक आक्रोश को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। जब तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आता, तब तक इन खबरों को सूचना युद्ध (Information Warfare) का हिस्सा भी माना जा सकता है, लेकिन इसने ईरान के भीतर अविश्वास की एक गहरी खाई जरूर पैदा कर दी है।
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