Ethiopia Volcano
Ethiopia Volcano: इथियोपिया में स्थित हेली गुब्बी ज्वालामुखी में हुए एक बड़े विस्फोट के कारण निकली राख के बादल अब भारत की हवाई सीमा तक पहुँच रहे हैं। इसका सीधा और तत्काल असर हवाई यातायात पर देखने को मिला है, जहाँ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने कई उड़ानें रद्द कर दी हैं। एयर इंडिया ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक एडवाइजरी जारी कर यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया, साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
पर्यावरणविद मन्नू सिंह ने बातचीत में बताया कि यह ज्वालामुखी विस्फोट अत्यधिक भयानक था, जिसकी क्षमता कई परमाणु बमों से अधिक हो सकती है। विस्फोट से निकली राख लगभग 15 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल में चली गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे समय में उड़ानों को तत्काल रद्द करना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि राख में छोटे-छोटे शीशे (गिलास) के कण मौजूद होते हैं। ये कण विमान के इंजन और अन्य हिस्सों के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं। ये पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impact) अत्यंत जोखिमपूर्ण होते हैं। राख के कण दो प्रकार के होते हैं: सूक्ष्म कण, जो कई महीनों तक हवा में रह सकते हैं, और भारी कण, जो नमी, जेट स्ट्रीम और हवा की दिशा के आधार पर कुछ घंटों या दिनों में नीचे आ जाते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, एयरलाइंस को कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
एआई 2822: चेन्नई से मुंबई
एआई 2466: हैदराबाद से दिल्ली
एआई 2444 / 2445: मुंबई-हैदराबाद-मुंबई
एआई 2471 / 2472: मुंबई-कोलकाता-मुंबई
एआई 106: न्यूयार्क से दिल्ली
एआई 102: न्यूयार्क से दिल्ली
एआई 2204: दुबई से हैदराबाद
एआई 2290: दोहा से मुंबई
एआई 2212: दुबई से चेन्नई
एआई 2250: दम्माम से मुंबई
एआई 2284: दोहा से दिल्ली
मन्नू सिंह के अनुसार, वर्तमान में जेट स्ट्रीम वेस्टरली (पछुआ हवा) है, जिसके चलते राख भारत की ओर आ रही है। उन्होंने अनुमान लगाया कि हवाई यातायात को सामान्य होने में 48 घंटे लग सकते हैं, बशर्ते कोई दूसरा विस्फोट न हो।उन्होंने कहा, “अगर कोई विस्फोट नहीं होता है, तो अगले 48 घंटों में भारी कण नीचे आ जाएंगे, जिसके बाद फ्लाइट मूवमेंट सामान्य हो जाएगा।” हालांकि, चूंकि ज्वालामुखी में अभी भी एक्टिविटी बढ़ी हुई है और यह एक डॉर्मेंट वोल्केनो (निष्क्रिय ज्वालामुखी) है जिसमें 12,000 साल बाद बड़ा विस्फोट हुआ है, इसलिए आने वाले दिनों में छोटे विस्फोटों की आशंका बनी हुई है।
मन्नू सिंह ने बताया कि हवा का रुख वेस्टर्नेली होने के कारण भारत में राख का आना एक सामान्य घटना है। पूर्वानुमान के अनुसार, इसका प्रभाव दिल्ली में भी कल रात से देखा जा सकता है। हालाँकि, हवा की दिशा में थोड़ा परिवर्तन होने के कारण दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र कुछ हद तक बच सकता है।
इस राख से हवा में जहर घुलने का खतरा है। दिल्ली में पहले से ही हवा काफी जहरीली है, और ज्वालामुखी विस्फोट से निकले शीशे के कण, फ्लोराइड, सल्फर और नाइट्रोजन जैसे विषाक्त तत्वों के कारण हवा अधिक विषाक्त हो सकती है। ये गैसें और कण फेफड़ों की प्रतिरक्षा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटे कण वातावरण में 6 से 8 महीने तक रह सकते हैं, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
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