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हर मुराद होती है पूरी… बाबा मुरादशाह वली के 152वें उर्स पाक की तैयारियाँ जोरों पर

अंबिकापुर @thetarget365 उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्राम तकिया में स्थित सूफी संत हजरत सैयद बाबा मुरादाबाद व मोहब्बत शाह वली रहमतुल्लाह अलैह की मजार शरीफ पर 152वां उर्स पाक 20, 21 और 22 मई को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पावन अवसर की तैयारियाँ जोरों पर हैं और आयोजन समिति हर पहलू पर बारीकी से कार्य कर रही है।

इसी कड़ी में आज अंजुमन कमेटी अंबिकापुर द्वारा ग्राम तकिया में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। कमेटी के सदर इरफान सिद्दीकी ने जानकारी दी कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी उर्स पाक का आयोजन भव्य रूप से किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति का कार्य पूर्ण हो चुका है, वहीं सड़क मरम्मत एवं अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा और यातायात के लिए भी ठोस इंतज़ाम किए जा रहे हैं।

कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष दानिश रफीक ने बताया कि अंबिकापुर के इतिहास में पहली बार नगर की सभी 13 मस्जिद कमेटियाँ एक साथ आकर उर्स पाक का आयोजन कर रही हैं। इस एकता से कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई मिल रही है। अनुमान है कि इस बार तीन दिवसीय आयोजन में लगभग 60 हजार श्रद्धालुओं की सहभागिता होगी।

मुरादों वाली मजार…

उत्तर-पूर्वी अंबिकापुर के तकिया गांव में स्थित इस मजार में हर धर्म और जाति के लोग हाजिरी देने आते हैं। यहां बाबा मुरादशाह वली और मोहब्बत शाह वली की मजार के साथ एक छोटी मजार भी है, जिसे “तोते की मजार” कहा जाता है। यहां आकर लोग चादर चढ़ाते हैं और मन्नत मांगते हैं — मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मजार के पास ही देवी स्थान भी स्थित है, जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है।

पीर बाबाओं के करामात…

लोककथाओं के अनुसार, सदियों पूर्व बाबा मुरादशाह वली जब तकिया पहुंचे, तब गांव भय के साए में था। एक राक्षसी रोज एक व्यक्ति की बलि लेती थी। बाबा ने एक गरीब कुम्हार के घर रुककर उसके पुत्र की बलि से मुक्ति दिलाने का वचन दिया। उन्होंने राक्षसी से मुकाबला किया और अपने चिमटे से उसकी नाक-कान दबाकर उसे परास्त कर दिया। राक्षसी के पानी मांगने पर बाबा ने पहाड़ में चिमटा मारकर जलधारा निकाल दी, जिसे आज बांक नदी के नाम से जाना जाता है।

बाबा के चमत्कार से प्रभावित होकर वह राक्षसी भी उनकी अनुयायी बन गई। बाबा की अनुमति से वह मजार के पीछे रहने लगी, और वहीं एक मंदिर स्थापित हुआ, जिसे आज नक्कटती देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी तकिया मजार पर आस्था का सैलाब उमड़ने वाला है, जहां हर दिल से निकली दुआ और हर जुबान से निकली मुराद को बाबा मुरादशाह वली पूरी करते हैं।

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