Farmers protest
Farmers protest Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर में धान खरीदी की धीमी प्रक्रिया और मंडी की अव्यवस्थाओं ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। बुधवार को जिले के बगीचा क्षेत्र में सैकड़ों किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। धान की बिक्री न होने से नाराज अन्नदाताओं ने बगीचा–बतौली स्टेट हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र में किसानों का यह उग्र प्रदर्शन प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
विवाद की मुख्य जड़ बगीचा अनुविभाग के अंतर्गत आने वाली बीमडा धान मंडी है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से मंडी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी उपज की खरीदी शुरू नहीं की जा रही है। आक्रोशित किसान अपने ट्रैक्टरों और धान से भरी बोरियों के साथ हाईवे पर जमा हो गए। इस विरोध प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर यात्री बसों, ट्रकों और निजी वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों और यात्रियों को घंटों तक कड़ाके की ठंड और जाम का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मंडी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि समय पर टोकन जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे वे अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। इसके अलावा, किसानों ने शिकायत की कि अधिकारी धान में नमी (Moisture) का हवाला देकर खरीदी से बार-बार इनकार कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, “खेतों से कटाई के बाद लाया गया धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। यदि समय पर खरीदी नहीं हुई, तो मौसम के बदलाव या मवेशियों के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।”
चक्काजाम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसडीएम (SDM) और तहसीलदार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बीच सड़क पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे किसानों से लंबी बातचीत की। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि टोकन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा और धान खरीदी में आ रही तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर किया जाएगा। हालांकि, किसान केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने ठोस कार्यवाही की मांग की।
जशपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गृह जिला है, ऐसे में यहाँ किसानों का सड़क पर उतरना सरकार की छवि पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। किसानों का तर्क है कि जब सूबे के मुखिया उनके अपने जिले से हैं, तब भी उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में भी गर्माहट पैदा कर दी है। जानकारों का मानना है कि यदि धान खरीदी केंद्रों पर जल्द ही सुधार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन जिले के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह लिखित आश्वासन देने के बाद कि आगामी 24 घंटों के भीतर बीमडा मंडी में सुचारू रूप से खरीदी शुरू कर दी जाएगी, किसानों ने फिलहाल जाम खोलने का निर्णय लिया। इसके बाद करीब दो घंटे से बंद पड़ा यातायात बहाल हो सका। हालांकि, किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा खरीदी रोकी गई या टोकन में पक्षपात हुआ, तो वे और भी उग्र आंदोलन करेंगे। फिलहाल प्रशासन मंडी की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है।
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