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अंबिकापुर @thetarget365 सरगुजा जिले में घोड़ों में पाई जाने वाली अत्यंत संक्रामक और खतरनाक बीमारी “ग्लैंडर्स” के लक्षण सामने आने से पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। शादी-विवाह जैसे आयोजनों में उपयोग किए जाने वाले एक घोड़े में इस बीमारी के संभावित लक्षण पाए गए हैं, जिसके बाद उसका रक्त सैंपल राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) भेजा गया है। यह पांचवीं बार है जब उसी घोड़े का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।
अब तक की जांचों में एक रिपोर्ट पॉजिटिव और एक निगेटिव आई है, जिससे पशु चिकित्सक असमंजस की स्थिति में हैं। पशुपालन विभाग के उपसंचालक आरपी शुक्ला के अनुसार “घोड़े का सैंपल पांचवीं बार जांच के लिए भेजा गया है, रिपोर्ट का इंतजार है। यदि ग्लैंडर्स की पुष्टि होती है, तो निर्धारित SOP के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घोड़ा पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन निगरानी में रखा गया है।”
ग्लैंडर्स बीमारी “बर्कहोल्डेरिया मैलेई” (Burkholderia mallei) नामक बैक्टीरिया से फैलती है और यह जूनोटिक संक्रमण है यानी जानवरों से इंसानों में भी फैल सकता है। इसलिए यह न केवल पशुओं के लिए बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।
अंबिकापुर शहर में संदिग्ध संक्रमित घोड़ा दो अन्य घोड़ों के साथ रखा गया है, और खबर है कि इन्हीं में से एक अन्य घोड़े की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है। ऐसे में खतरे की आशंका और बढ़ गई है। सरगुजा जिले में वर्तमान में कुल 28 घोड़े/खच्चर पंजीकृत हैं। बीमारी की पुष्टि होने पर संबंधित घोड़े को गाइडलाइन के तहत डिस्पोज (मुक्ति) किया जाएगा, और इसके एवज में घोड़ा मालिक को आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी।
मैनपाट सहित सरगुजा के कई पर्यटन स्थलों में घोड़ों/खच्चरों का उपयोग पर्यटकों की सवारी के लिए किया जाता है। यहां घोड़े/खच्चर स्थानीय आय का स्रोत भी हैं। ऐसे में यदि यह बीमारी फैलती है तो न केवल पर्यटन बल्कि आम जन स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में ग्लैंडर्स की वजह से अब तक 10 घोड़ों की मौत हो चुकी है। वहां भी हिसार लैब को सैंपल भेजे गए थे। एक मामले में रिपोर्ट आने से पहले ही घोड़े की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे पॉजिटिव केस के बाद ग्लैंडर्स नियंत्रण प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है।
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे घोड़ों या खच्चरों में असामान्य लक्षण देखें तो तुरंत पशु चिकित्सकों से संपर्क करें, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। ग्लैंडर्स जैसी जूनोटिक और जानलेवा बीमारी की आशंका ने उत्तर छत्तीसगढ़ को सतर्क कर दिया है। पशुपालन विभाग की निगरानी और सावधानीपूर्ण कदम समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं।
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