Finance Bill 2026
Finance Bill 2026: लोकसभा में आज आगामी वित्त वर्ष के लिए वित्तीय प्रस्तावों को प्रभावी बनाने वाले वित्त विधेयक 2026 पर जोरदार चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में विधेयक पेश करते हुए देश की आर्थिक स्थिति और सरकार के विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र निर्माण रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। वित्त मंत्री के संबोधन में जहाँ एक ओर भविष्य का आत्मविश्वास दिखा, वहीं दूसरी ओर पिछली सरकारों की आर्थिक नीतियों पर तीखा प्रहार भी शामिल रहा।
निर्मला सीतारमण ने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार को विरासत में बैंकों की जर्जर हालत और ‘डबल बैलेंस शीट’ की समस्या मिली थी। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष के शासनकाल में देश ने लगातार 22 महीनों तक दहाई अंक (डबल डिजिट) में महंगाई का सामना किया था, जो अपने आप में एक नकारात्मक रिकॉर्ड है। वित्त मंत्री ने कहा, “आज हम उन कर्जों का ब्याज चुका रहे हैं जो इनके दौर में लिए गए थे। जब आज हमारे बैंकों की स्थिति सुदृढ़ है, तब ये लोग केवल आलोचना करने के लिए सदन में मौजूद हैं।”
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड संकट जैसी वैश्विक आपदा का भी भारत पर बहुत सीमित असर पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधार किसी वैश्विक दबाव या मजबूरी का परिणाम नहीं हैं। ये सुधार पूर्ण स्पष्टता, प्रतिबद्धता और आत्मविश्वास के साथ किए जा रहे हैं। सीतारमण ने गौरव के साथ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत ‘सुधार एक्सप्रेस’ पर सवार हो चुका है, जो विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।
चर्चा के दौरान जब विपक्ष के कई सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे, तो वित्त मंत्री ने उन्हें जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है कि विपक्ष सवाल तो उठाता है, लेकिन जब सरकार तथ्यों के साथ जवाब देने खड़ी होती है, तो वे सुनने के लिए अपनी कुर्सियों पर मौजूद नहीं रहते। गौरतलब है कि इस सत्र में दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 भी पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसका उद्देश्य 2016 के मूल कानून को और अधिक प्रभावी बनाना है।
इधर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक हालातों, विशेषकर पश्चिम एशिया (अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान) में जारी युद्ध पर गंभीर चिंता व्यक्त की। पीएम मोदी ने आगाह किया कि यदि यह जंग लंबी खिंचती है, तो इसके वैश्विक और राष्ट्रीय दुष्परिणाम बेहद गंभीर होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाला समय देश के लिए सबसे बड़ी परीक्षा का होगा। प्रधानमंत्री ने ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर देते हुए कहा कि इस कठिन समय में केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा ताकि देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को स्थिर रखा जा सके।
संसद के गलियारों से एक और बड़ी खबर यह आई कि सरकार फिलहाल महिला आरक्षण कानून में बदलाव के लिए कोई नया संविधान संशोधन बिल लाने के विचार में नहीं है। लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। वहीं, बजट सत्र के दूसरे चरण की बात करें तो सूत्रों का कहना है कि 11वें दिन की कार्यवाही के बाद अब सत्र को निर्धारित समय से पहले, यानी 2 अप्रैल तक स्थगित किया जा सकता है।
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