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बेंगलुरू भगदड़ मामले में आरसीबी के खिलाफ एफआईआर

@TheTarget365 : बेंगलुरू भगदड़ मामले में आरसीबी, डीएनए (इवेंट मैनेजर), केएससीए प्रशासनिक समिति और अन्य के खिलाफ कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में भगदड़ की घटना में आपराधिक लापरवाही का उल्लेख किया गया है। आईपीएल-2025 के फाइनल में आरसीबी की जीत के बाद 4 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी खिलाड़ियों के लिए रिसेप्शन का आयोजन किया गया था। इस दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने से 11 लोगों की जान चली गई थी।

भगदड़ मामले पर गुरुवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में भी सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने सरकार को उस मामले में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है जिसमें 11 लोग मारे गए थे और 50 से अधिक घायल हुए थे। मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। इसमें 10 जून तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सी.एम. जोशी की पीठ ने अदालत की रजिस्ट्री से कहा कि वह इस मामले पर जनहित याचिका के रूप में स्वत: संज्ञान लेते हुए विचार करे।

दोषारोपण का खेल ठीक नहीं: शशि किरण शेट्टी
महाधिवक्ता शशि किरण सेठी ने कहा कि स्टेडियम में मुफ्त प्रवेश की घोषणा के कारण गेट पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे भगदड़ मच गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को नकारात्मक नजरिए से नहीं देखना चाहती। दोषारोपण का खेल सही नहीं है। हमारा लक्ष्य यह पता लगाना है कि कहां गलती हुई और यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों।

एसओपी का पालन करना जरूरी: हाईकोर्ट
समारोह के दौरान सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बारे में उन्होंने कहा कि स्टेडियम के बाहर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी। स्टेडियम के अंदर और आसपास 250,000 से अधिक लोग एकत्र हुए। जहां स्टेडियम की क्षमता लगभग 30,000 है। लोग कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि स्टेडियम में इतनी भीड़ होगी। इस संबंध में पीठ ने कहा कि बड़े सार्वजनिक समारोहों के लिए एसओपी का पालन किया जाना चाहिए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि घटनास्थल पर एम्बुलेंस होनी चाहिए थी। इसके साथ ही आस-पास के अस्पतालों के बारे में भी पूरी जानकारी होनी चाहिए थी। इस संबंध में शशि किरण सेठी ने कहा कि वहां एंबुलेंस तो थी लेकिन इतनी बड़ी घटना के लिए वे पर्याप्त नहीं थीं। मजिस्ट्रेट स्तर की जांच पहले ही शुरू हो चुकी है और 15 दिनों के भीतर पूरी हो जाएगी। हम इसकी जांच कर रहे हैं कि गलती कहां हुई। किसी को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

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