उदयपुर @thetarget365 सरगुजा जिले के विकासखंड उदयपुर में इन दिनों पारंपरिक लोक नृत्य शैला की धूम है। जनवरी के प्रथम सप्ताह में फसल कटाई के उपलक्ष्य में यह नृत्य हर वर्ष आयोजित किया जाता है। शैला नृत्य छत्तीसगढ़ की जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान है, जो छेरछेरा पर्व से पहले शुरू होता है।
सैलानी नर्तक दल गांव-गांव जाकर अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन करते हैं। बदले में उन्हें किसानों की ओर से इनाम के रूप में धान, चावल और धनराशि दी जाती है। नर्तक दल एक गांव से दूसरे गांव पलायन करते हुए अपनी परंपरा को निभाते हैं।
उदयपुर मुख्यालय और आसपास के तेंदू, टिकरापारा, चेकरी, मोहनपुर, सुखरी भंडार, कुंडेली और मार्या सहित अन्य गांवों में लगभग 40 नर्तक दल सक्रिय हैं। बच्चों और युवाओं में इस नृत्य को देखने का खासा उत्साह है।
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