Football penalty rule : फुटबॉल की सबसे बड़ी संस्था IFAB (International Football Association Board) 2026 में होने वाले फीफा विश्व कप से पहले कई बड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इनमें सबसे अहम बदलाव पेनल्टी नियमों से जुड़ा है, जो बीते 134 सालों से चला आ रहा था। यह बदलाव फुटबॉल के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि कोई खिलाड़ी पेनल्टी शॉट लेता है और गेंद गोलकीपर या पोस्ट से टकराकर वापस आती है, तो अब वह खिलाड़ी दोबारा उसी बॉल से गोल नहीं कर सकेगा। वर्तमान नियमों में ऐसा करना वैध होता है, लेकिन नया नियम इसे रोक देगा। इसका कारण यह बताया गया है कि रिटर्न बॉल से दोबारा गोल करने पर हमलावर टीम को अनुचित लाभ मिलता है, जिससे खेल की निष्पक्षता प्रभावित होती है। यह बदलाव खेल को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
नए नियम के तहत पेनल्टी के दौरान बॉक्स में घुसने वाले खिलाड़ियों पर भी नियंत्रण रखा जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि पेनल्टी से पहले या तुरंत बाद हमलावर टीम के खिलाड़ी बॉक्स में घुस जाते हैं, जिससे रिबाउंड पर गोल करने की संभावना बढ़ जाती है। इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, IFAB पेनल्टी को पेनल्टी शूटआउट की तरह मानने की दिशा में विचार कर रही है। यानी, एक बार शॉट लिया गया तो उसका परिणाम वहीं तय हो जाएगा — दोबारा कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे फॉलो-अप गोल की संभावना खत्म हो जाएगी।
इस संभावित बदलाव की पृष्ठभूमि में 2020 के यूरो कप की एक बड़ी घटना का जिक्र किया जा रहा है। उस मैच में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने पेनल्टी शॉट लिया था, जिसे डेनमार्क के गोलकीपर कैस्पर श्माइचेल ने रोक लिया था। लेकिन रिटर्न बॉल पर केन ने गोल कर दिया था। उस समय यह गोल वैध था, लेकिन अब IFAB इसे अनुचित लाभ मान रही है और इसी तर्ज पर नियमों को बदलने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
नए प्रस्तावों में सिर्फ पेनल्टी ही नहीं, बल्कि रेड कार्ड दिखाने के नियमों में भी संशोधन की बात हो रही है। खासतौर पर तब, जब किसी खिलाड़ी को दूसरा पीला कार्ड दिखाने के बाद रेड कार्ड दिखाना होता है। ऐसे मामलों में रेफरी को निर्णय लेने में भ्रम होता है, जिससे गलत फैसले की आशंका रहती है। अब प्रस्तावित नियमों में यह सुझाया गया है कि रेफरी दोबारा ‘रेफर’ कर सकते हैं यानी वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की मदद ले सकते हैं। इससे निर्णय ज्यादा सटीक और निष्पक्ष होगा।
इसके अलावा, कॉर्नर किक से जुड़े विवादित निर्णयों में भी रेफरी अब तकनीकी सहायता ले सकेंगे। इस प्रस्ताव पर हाल ही में अमेरिका में आयोजित क्लब वर्ल्ड कप के दौरान चर्चा हुई थी। अब IFAB इस दिशा में अंतिम निर्णय लेने के करीब है।उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ महीनों में इन नए नियमों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी और 2026 विश्व कप से पहले ये पूरी तरह से लागू हो जाएंगे।फुटबॉल की दुनिया में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है। 134 साल पुराने नियमों को बदलने का फैसला खेल की निष्पक्षता और तकनीकी पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। आगामी विश्व कप में दर्शकों को खेल के एक नए रूप का अनुभव मिलेगा।
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