Palestine State : इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी तनाव और हिंसा के बीच फ्रांस ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी है। यह घोषणा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सोमवार को की, जहां 140 से अधिक वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में इस घोषणा पर ज़ोरदार तालियां गूंजीं।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, “मध्य पूर्व और इजरायली-फिलिस्तीनी शांति के प्रति फ्रांस की ऐतिहासिक प्रतिबद्धता के अनुरूप, आज मैं घोषणा करता हूं कि फ्रांस फिलिस्तीन को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देता है।” यह कदम फ्रांस और सऊदी अरब की अध्यक्षता में आयोजित उस विशेष संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान उठाया गया, जिसका उद्देश्य इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए टू-स्टेट मॉडल को वैश्विक समर्थन देना है।
फ्रांस की इस घोषणा पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कदम हमास जैसे उग्रवादी संगठनों को ताकत देगा, और इजरायल गाजा और वेस्ट बैंक में अपनी सुरक्षा नीति को और सख्त कर सकता है। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि वह अगले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद प्रतिक्रिया तय करेंगे।
वहीं ट्रंप प्रशासन ने भी इस मान्यता का विरोध किया है। अमेरिका ने फिलिस्तीन को मान्यता देने की प्रक्रिया को हमास के साथ युद्धविराम वार्ता के विफल होने का कारण बताया है।
फ्रांस के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में करीब 10 और देश इसी दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। अब तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से लगभग तीन-चौथाई ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है, लेकिन प्रमुख पश्चिमी देशों की ओर से यह एक नया बदलाव है।
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सम्मेलन को संबोधित किया। उन्हें अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया था। अब्बास ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मजबूती देता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी कहा कि “राज्य का दर्जा फिलिस्तीनियों का अधिकार है, कोई इनाम नहीं।” उन्होंने टू-नेशन समाधान को ही इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के लिए एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बताया।
फ्रांस और सऊदी अरब ने एक चरणबद्ध योजना प्रस्तुत की है, जिसके तहत एक सुधारित फिलिस्तीनी प्राधिकरण को अंतरराष्ट्रीय सहायता से गाजा और वेस्ट बैंक का प्रशासन सौंपा जाएगा। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव को 142 देशों का समर्थन मिला।
फ्रांस की यह ऐतिहासिक घोषणा फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि इजरायल और अमेरिका का विरोध जारी है, लेकिन टू-नेशन समाधान के समर्थकों का मानना है कि इसी रास्ते से स्थायी शांति की नींव रखी जा सकती है।
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