Friedrich Merz Ahmedabad Visit: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ अपनी दो दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा के लिए सोमवार को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। अपनी यात्रा की शुरुआत में दोनों वैश्विक नेताओं ने साबरमती आश्रम (गांधी आश्रम) का दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 1917 में स्थापित यह आश्रम भारत के स्वतंत्रता संग्राम का ऊर्जा केंद्र रहा है। ऐतिहासिक हृदय कुंज को देखने के बाद, दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुँचे, जहाँ उन्होंने रंग-बिरंगे ‘अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव’ का उद्घाटन किया। यह यात्रा भारत और जर्मनी के बीच प्रगाढ़ होते सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है।
रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष: द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा
गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मुख्य कार्यक्रमों में पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे। विशेष रूप से, दोनों देशों की इस विशेष साझेदारी ने हाल ही में अपने गौरवशाली 25 वर्ष पूरे किए हैं। शाम के सत्र में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, निवेश, उच्च तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता वैश्विक महत्व के मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी गहन विचार-विमर्श करेंगे। चांसलर मर्ज़ के साथ 25 प्रमुख जर्मन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) का एक उच्च-स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
रक्षा सहयोग: 8 अरब डॉलर की ऐतिहासिक पनडुब्बी डील
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा क्षेत्र में होने वाली ‘मेगा डील’ मानी जा रही है। भारत के ‘प्रोजेक्ट-75I’ के तहत करीब 8 अरब डॉलर की लागत से 6 अत्याधुनिक स्टेल्थ पनडुब्बियों के निर्माण पर अंतिम मुहर लग सकती है। भारतीय नौसेना ने इसके लिए जर्मनी की टाइप 214NG पनडुब्बी को प्राथमिकता दी है, जो एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस है। इस परियोजना के तहत जर्मनी की कंपनी TKMS तकनीकी डिजाइन और इंजीनियरिंग प्रदान करेगी, जबकि भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) इनका स्वदेशी निर्माण करेगी। यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाई देगा।
आर्थिक आंकड़े: भारत-जर्मनी व्यापारिक संबंधों की मजबूती
जर्मनी वर्तमान में भारत का 9वां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और यूरोपीय संघ (EU) में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 51.23 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जो भारत के कुल यूरोपीय व्यापार का लगभग एक चौथाई है। साल 2024-25 में सेवाओं का व्यापार 16.65 अरब डॉलर रहा है, जबकि अप्रैल 2000 से जून 2025 तक जर्मनी से भारत में 15.40 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। चांसलर की यह यात्रा आर्थिक संबंधों को और अधिक गति प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।
ग्रीन एनर्जी: भारत बनेगा जर्मनी का ऊर्जा साझेदार
ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक बड़ा समझौता होने की उम्मीद है। जर्मनी अपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भारत की ओर देख रहा है। जर्मन सरकारी कंपनी ‘यूनिपर’ भारत से ग्रीन अमोनिया खरीदने की तैयारी में है, जिसका उपयोग स्वच्छ ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में किया जाता है। भारत के ‘ग्रीनको ग्रुप’ के साथ पहले ही एक प्रारंभिक समझौता हो चुका है, जिसके तहत प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति की जा सकती है। यह डील न केवल पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करेगी बल्कि भारत को ग्रीन फ्यूल के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगी।
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