अजित पवार
NCP Future After Ajit Pawar :महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बुधवार, 28 जनवरी 2026 का दिन एक भीषण त्रासदी का गवाह बना। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार का बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। यह हादसा उस वक्त हुआ जब वे जिला परिषद चुनाव के प्रचार के लिए जा रहे थे। अजित पवार के अचानक चले जाने से न केवल राज्य सरकार में एक बड़ा शून्य पैदा हुआ है, बल्कि उनकी पार्टी के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अब सबकी नजरें उनकी विरासत और पार्टी के भविष्य पर टिकी हैं।
अजित पवार बुधवार सुबह जब बारामती के लिए रवाना हुए, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी अंतिम यात्रा होगी। लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड विमान क्रैश होकर आग की लपटों में घिर गया। इस हृदयविदारक घटना में अजित पवार समेत विमान में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी सुनेत्रा पवार और दो बेटे, पार्थ और जय हैं। सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और लंबे समय से सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं।
अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी राजनीतिक विरासत का है। चर्चा है कि सुनेत्रा पवार एनसीपी (अजित गुट) की कमान संभाल सकती हैं। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ बारामती से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पवार परिवार में पैदा हुई उस दरार के बाद अब स्थितियां बदल चुकी हैं। यदि पार्टी स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखना चाहती है, तो सुनेत्रा ही नेतृत्व के लिए सबसे स्वाभाविक चेहरा मानी जा रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में एक मजबूत चर्चा यह भी है कि अजित पवार के नेतृत्व वाली पार्टी अब वापस शरद पवार के साथ विलय (Merge) की राह पकड़ सकती है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे से पहले ही अजित पवार अपने चाचा के साथ सुलह करने पर विचार कर रहे थे। हाल के महीनों में दोनों गुटों के बीच कड़वाहट कम होती दिखी थी। परिवार के सदस्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ नजर आए थे और आगामी निकाय चुनावों के लिए भी दोनों गुटों ने गठबंधन का ऐलान किया था। ऐसे में, कार्यकर्ताओं का दबाव पार्टी को फिर से एक करने पर हो सकता है।
भविष्य के नेतृत्व को लेकर नई पीढ़ी के बीच भी कशमकश देखी जा सकती है। अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को उनके उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा है। 2019 में मावल सीट से चुनावी हार के बाद पार्थ ने लो-प्रोफाइल रहकर संगठन में काम किया। दूसरी ओर, शरद पवार अपने पोते रोहित पवार को नेतृत्व के लिए तैयार कर रहे हैं। पार्थ और रोहित के बीच का यह समीकरण दोनों गुटों के विलय में एक बड़ी चुनौती बन सकता है। क्या सुनेत्रा पवार और उनके बेटे शरद पवार के नेतृत्व को स्वीकार करेंगे, यह आने वाले दिनों का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है।
अजित पवार का जाना महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। यदि एनसीपी का विलय नहीं होता है, तो सुनेत्रा या पार्थ में से किसी एक को कमान संभालनी होगी। लेकिन यदि शरद पवार एक संरक्षक की भूमिका निभाते हैं, तो महाराष्ट्र में फिर से एक शक्तिशाली और एकजुट एनसीपी का उदय हो सकता है। फिलहाल, बारामती से लेकर मुंबई तक सन्नाटा है और हर कोई अगले राजनीतिक कदम की प्रतीक्षा कर रहा है।
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