Tushar Gandhi Padyatra: महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी 29 सितंबर 2025 से एक महत्वपूर्ण पदयात्रा निकालने जा रहे हैं। इस पदयात्रा का उद्देश्य है नफरत की राजनीति के खिलाफ आवाज उठाना और संविधान तथा देश की एकता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना। यह यात्रा नागपुर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को वर्धा के सेवाग्राम आश्रम में समाप्त होगी, जहां महात्मा गांधी ने अपने कई साल बिताए थे।
तुषार गांधी के नेतृत्व में यह पदयात्रा नागपुर के दीक्षाभूमि से शुरू होगी। दीक्षाभूमि का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि यह जगह डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भारतीय संविधान को जन्म देने के बाद अपना संकल्प स्थल बनाया था। इस पदयात्रा के तहत देश में बढ़ती नफरत और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ संविधान की सुरक्षा और गांधीवादी विचारधारा को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।
29 सितंबर से पहले ही नागपुर में एक मशाल मार्च निकाला गया, जिसमें महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी शामिल हुए। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान को सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है। सपकाल ने आरएसएस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें गांधीवादी विचारों को अपनाना चाहिए और “नाथूराम गोडसे और मनुस्मृति को अलविदा कहना चाहिए।”
पदयात्रा शुरू करने से पहले तुषार गांधी ने कहा, “यह पदयात्रा नफरत की राजनीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश होगी। हम संविधान की रक्षा और देश में एकता, भाईचारे तथा शांति का प्रचार करेंगे। महात्मा गांधी और उनके आदर्श आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं।”
मशाल मार्च के दौरान कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने महाराष्ट्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में आई भारी बारिश के बाद भी बीजेपी-शासित सरकार ने केंद्र को कोई ठोस रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इसके कारण मुख्यमंत्री खाली हाथ लौटे हैं। सपकाल ने प्रभावित किसानों के लिए तत्काल और पर्याप्त सहायता देने की मांग की।
शुरुआत: 29 सितंबर 2025, नागपुर, दीक्षाभूमि से
मशाल मार्च: 28 सितंबर को नागपुर में आयोजित
समापन: 2 अक्टूबर 2025, वर्धा, सेवाग्राम आश्रम
मुख्य उद्देश्य: नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुटता का संदेश देना, संविधान की रक्षा करना और गांधीजी के आदर्शों को जीवित रखना।
तुषार गांधी की यह पदयात्रा सिर्फ एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना को बनाए रखने और देश में सद्भावना और शांति फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे कदम देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मददगार साबित होते हैं। इस पदयात्रा से नफरत, वैमनस्य और असहिष्णुता की राजनीति को परास्त कर, गांधीजी के ‘सत्याग्रह’ और ‘अहिंसा’ के संदेश को पुनः प्राणित किया जाएगा।
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