Ganesh Chaturthi 2025: आज देशभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी गणेश चतुर्थी बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। हर घर और मोहल्ले में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। शहर की प्रमुख समितियां भी थीम आधारित भव्य पंडालों की तैयारियों में जुटी हुई हैं। रायपुर में सोमवार से ही पंडालों में गणपति की मूर्तियां आने लगी हैं, जो इस पर्व की शुरूआत का प्रतीक हैं।
रायपुर के लाखे नगर में इस बार गणेश चतुर्थी की एक खास पेशकश की गई है। यहां की गणेश प्रतिमा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से डिजाइन की गई है। इससे पहले भी इस प्रतिमा ने पिछले साल छत्तीसगढ़ में चर्चा बटोरी थी। इस बार इस मूर्ति में तकनीक का और भी अनूठा प्रयोग किया गया है। मूर्ति की आंखों की पलकें मोटर के माध्यम से खुलती और बंद होती हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए एक नया आकर्षण है। आज शाम को इस प्रतिमा का फेस रिवील समारोह होगा, जिसका इंतजार भक्तगण बेसब्री से कर रहे हैं।
रायपुर सेंट्रल जेल में भी इस वर्ष भव्य गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। खास बात यह है कि जेल में बंदियों ने मिट्टी से भगवान गणेश की सुंदर मूर्तियां बनाई हैं। आजीवन कारावास की सजा काट रहे छह बंदियों ने मुख्य मूर्ति का निर्माण किया है। इसके अलावा 250 से अधिक मूर्तियां तैयार की गईं, जो अब तक पूरी तरह बिक चुकी हैं। इस पहल की राज्य सरकार और समाज ने खूब सराहना की है, जिससे बंदियों की कला और प्रयासों को एक नया मंच मिला है।
रायपुर के गोलबाजार में श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा गणपति बप्पा का 750 ग्राम के सोने के मुकुट से श्रृंगार किया जाएगा। यह परंपरा 2018 से निरंतर चल रही है। इस मुकुट की बाजार कीमत लगभग 70 लाख रुपए आंकी गई है। इस साल यह 116वां वर्ष है जब यह भव्य आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित कई विधायक और राजनीतिक नेता शामिल होंगे।
रायपुर के गुढियारी गणेशोत्सव समिति ने इस बार भगवान शिव की महिमा पर आधारित भव्य पंडाल सजाया है। करीब 15 हजार वर्गफीट में फैले इस पंडाल में अर्धनारीश्वर, सावन की पूजा, गंगा अवतरण, मार्कंडेय ऋषि का उद्धार, सागर मंथन, भोले की बारात, रावण का कैलाश पर्वत उठाना, और कैलाश मानसरोवर जैसी झांकियां आकर्षण का केंद्र हैं। यह पंडाल करीब 25 लाख रुपए की लागत से तैयार किया गया है और समिति का यह 105वां आयोजन है। भक्तगण यहां ब्रह्मांड के सौर मंडल के बीच विराजमान बप्पा के दर्शन कर सकेंगे।
इस बार की गणेश चतुर्थी छत्तीसगढ़ में आधुनिक तकनीक, कला, और पारंपरिक भक्ति के अनूठे संगम के रूप में उभर कर सामने आई है। जहां लाखे नगर की AI तकनीक से बनी मूर्ति ने नया आयाम जोड़ा है, वहीं जेल के बंदियों की कलाकृतियां सामाजिक समावेशिता का संदेश दे रही हैं। गोलबाजार की भव्य सोने की श्रृंगार रस्म और गुढियारी समिति के भव्य थीम पंडाल ने इस पर्व को और भी खास बना दिया है।
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