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Delhi SAU Gangrape: दिल्ली SAU कैंपस में ‘गैंगरेप’ से हड़कंप, वार्डन बर्खास्त; सुरक्षा के बीच छात्रों में दहशत

Delhi SAU Gangrape: राजधानी दिल्ली के दिल से महज 20 किलोमीटर दूर साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU) कैंपस में रविवार शाम एक छात्रा के साथ हुए कथित गैंगरेप की घटना से पूरा इलाका सदमे में है। इंडिया गेट के पास राजधानी के केंद्र में हुई इस वारदात ने दिल्ली की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद कैंपस छावनी में तब्दील हो गया है, जहाँ कड़ी सुरक्षा के बीच छात्र-छात्राएं दहशत में अपने घरों को लौट रहे हैं।

दहशत के साये में कैंपस

लक्ष्मीबाई नगर में स्थित इस विशाल कैंपस के चारों ओर ऑफ-व्हाइट बिल्डिंग्स खामोशी में डूबी हैं। चारों ओर के गेट बंद कर दिए गए हैं। डिलीवरी बॉय से लेकर छात्रों और कर्मचारियों तक को एंट्री-एग्जिट के लिए कड़ी जाँच से गुजरना पड़ रहा है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी सभी गेटों पर निजी सुरक्षाकर्मियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।

यूनिवर्सिटी के बाहर घंटों खड़े रहने पर जो छात्र घर जाते दिखे, उनमें से अधिकांश छात्राएं थीं। अर्थशास्त्र की एक पोस्टग्रेजुएट छात्रा ने कैब में ओटीपी देते हुए बताया, “क्या कहें, घर से बहुत दबाव है, इसलिए अभी वापस जा रहे हैं।” एक अन्य छात्रा ने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा, “क्या आपको यह भी बताने की जरूरत है? समझते नहीं?” छात्राओं का यह पलायन कैंपस में फैली असुरक्षा और दहशत को साफ दर्शा रहा है।

पुलिस जांच और कर्मचारियों का दावा

गेट नंबर 1 पर तैनात एक निजी सुरक्षाकर्मी ने हालाँकि यह दावा किया कि यह सख्त सुरक्षा व्यवस्था इस विशेष घटना के लिए नहीं है, बल्कि ‘हमेशा ऐसी ही रहती है।’ वहीं, जब पुलिस जाँच की स्थिति जानने के लिए गेट के अंदर मौजूद दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर हीरा सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन से बात करने की सलाह देते हुए पल्ला झाड़ लिया।

छात्रों का बहिष्कार और प्रशासन पर कार्रवाई

यूनिवर्सिटी के बाहर भले ही दबी हुई टेंशन हो, लेकिन अंदर छात्र आक्रोशित हैं। घटना के विरोध में आज यूनिवर्सिटी में कोई क्लास नहीं लगी। छात्रों ने सभी कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए प्रशासनिक भवन के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

विदेश मंत्रालय के अधीन आने वाली इस यूनिवर्सिटी में प्रत्यक्ष तौर पर कोई छात्र राजनीतिक संगठन सक्रिय नहीं है, लेकिन एसएफआई जैसे वामपंथी छात्र संगठन और एबीवीपी के प्रतिनिधि छात्र आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

छात्रों के भारी दबाव का सामना करते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से वार्डन डॉ. रिंकू गुप्ता को बर्खास्त कर दिया है और सहायक वार्डन अनुपमा अरोड़ा को निलंबित कर दिया है। इन दोनों के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही, पीड़ित की शिकायत को नजरअंदाज करने के आरोपों के आधार पर विभागीय जाँच शुरू की गई है। छात्र आरोपितों को तत्काल सजा देने की मांग पर अड़े हैं।

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