Ganganagar Honeymoon Murder: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से एक ऐसा रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज और पारिवारिक रिश्तों की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे इंदौर के कुख्यात राजा रघुवंशी हत्याकांड की तर्ज पर ‘हनीमून मर्डर’ कहा जा रहा है। यहां एक नवविवाहिता ने सात फेरों के वचनों को भुलाकर, शादी के महज तीन महीने बाद ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की नृशंस हत्या कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी वारदात को एक ‘हिट एंड रन’ यानी सड़क हादसे का रूप देने की बेहद शातिर कोशिश की गई थी, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।

वारदात की रात: ‘हादसे’ की झूठी कहानी और लूट का नाटक
घटनाक्रम 30 जनवरी की रात करीब 9 बजे का है। रावला थाना क्षेत्र के अनूपगढ़ मार्ग पर 23 वर्षीय आशीष और उसकी पत्नी अंजू सड़क किनारे अचेत अवस्था में मिले। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने आशीष को मृत घोषित कर दिया, जबकि अंजू सुरक्षित थी। अंजू ने पुलिस को रोते हुए कहानी सुनाई कि वे दोनों टहल रहे थे, तभी एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। उसने यह भी दावा किया कि टक्कर के बाद कुछ बदमाशों ने उसकी सोने की ज्वेलरी और मोबाइल फोन लूट लिया। पहली नजर में यह मामला लूटपाट और सड़क दुर्घटना का लगा, लेकिन पुलिस की पैनी नजर ने जल्द ही झूठ पकड़ लिया।
पुलिस को हुआ शक: मेडिकल रिपोर्ट और मोबाइल ने खोला राज
गंगानगर एसपी अमृतु दुहान के नेतृत्व में जब जांच शुरू हुई, तो पुलिस को अंजू के बयान में कई विरोधाभास नजर आए। सबसे बड़ा संदेह तब हुआ जब मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आशीष की मौत दुर्घटना से नहीं, बल्कि गला घोंटने (स्ट्रांगुलेशन) और बेरहमी से पिटाई के कारण हुई थी। एफएसएल (FSL) टीम को भी घटनास्थल पर किसी वाहन के टकराने के साक्ष्य नहीं मिले। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि जिस कथित हादसे में पति की जान चली गई, उसी में साथ खड़ी पत्नी अंजू को मामूली खरोंच तक नहीं आई थी। जब पुलिस ने अंजू का मोबाइल रिकॉर्ड खंगाला, तो सादुलशहर निवासी उसके पुराने प्रेमी संजू का सुराग मिला।
साजिश का खुलासा: सुनसान सड़क पर बिछाया गया मौत का जाल
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जो हकीकत सामने आई, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। आशीष की पत्नी अंजू अपनी शादी से खुश नहीं थी और वह अपने प्रेमी संजू के साथ रहना चाहती थी। जब वह कुछ दिन पहले अपने मायके सादुलशहर गई थी, वहीं उसने संजू और उसके दो साथियों (रॉकी और बादल) के साथ मिलकर आशीष की हत्या का ब्लूप्रिंट तैयार किया। योजना के मुताबिक, 30 जनवरी की रात अंजू जानबूझकर आशीष को डिनर के बाद टहलने के बहाने सुनसान रास्ते पर ले गई। वहां पहले से झाड़ियों में छिपे संजू और उसके साथियों ने आशीष पर हमला कर दिया। पहले उसे डंडों से पीटा गया और फिर गला घोंटकर उसकी जान ले ली गई।
लूट की मनगढ़ंत कहानी: खुद सौंपे गहने और फोन
हत्या के बाद मामले को भटकाने के लिए आरोपियों ने इसे लूट का रंग देने की कोशिश की। अंजू ने खुद अपनी सोने की बालियां और अपना मोबाइल फोन संजू को सौंप दिया ताकि वह पुलिस को बता सके कि बदमाशों ने उन पर हमला कर लूटपाट की है। पुलिस को गुमराह करने के लिए वह सड़क पर बेहोशी का नाटक करने लगी। हालांकि, वह यह भूल गई कि आधुनिक फॉरेंसिक जांच और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के इस दौर में अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून की पहुंच से बाहर नहीं रह सकता।
कानूनी कार्रवाई: चारों आरोपी सलाखों के पीछे
रावला थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुख्य आरोपी पत्नी अंजू, उसके प्रेमी संजू और सहयोगी रॉकी उर्फ रोहित व बादल उर्फ सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआत में अंजू लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस को गुमराह करती रही, लेकिन जब पुलिस ने संजू के साथ उसकी बातचीत के पुख्ता सबूत सामने रखे, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अब आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों को बरामद किया जा सके। इस घटना ने पूरे श्रीगंगानगर में सनसनी फैला दी है।

















