Gariaband News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां मनोरंजन के नाम पर परोसी गई अश्लीलता ने प्रशासनिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। मैनपुर के एसडीएम तुलसी दास मरकाम को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने न केवल इस अश्लील कार्यक्रम को नियम विरुद्ध अनुमति दी, बल्कि खुद वहां मौजूद रहकर इस फूहड़ता को बढ़ावा दिया। रायपुर कमिश्नर महादेव कावरे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी किया है।
नियम ताक पर रखकर दी अनुमति: मनोरंजन के नाम पर हुआ फूहड़ प्रदर्शन
मामला उरमाल गांव का है, जहां एक स्थानीय युवा समिति ने 6 दिवसीय ‘ओपेरा’ यानी ऑर्केस्ट्रा के आयोजन के लिए अनुमति मांगी थी। 29 दिसंबर 2025 को एसडीएम तुलसी दास ने इस कार्यक्रम को हरी झंडी दी थी। लेकिन, कार्यक्रम के जो वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, वे सभ्य समाज को शर्मसार करने वाले हैं। जांच में पुष्टि हुई है कि मंच पर डांसर्स ने अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी थीं। सार्वजनिक रूप से ऐसे कृत्य किए गए जिन्हें किसी भी दृष्टि से कानूनी या नैतिक नहीं ठहराया जा सकता।

रक्षक ही बने भक्षक: कैमरे में कैद हुई एसडीएम और पुलिसकर्मियों की अश्लीलता
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिकारियों की थी, वहीं वे खुद इस दलदल में डूबे नजर आए। वायरल वीडियो में एसडीएम तुलसी दास मरकाम खुद मोबाइल से अश्लील डांस का वीडियो बनाते और कलाकारों पर पैसे लुटाते देखे गए। इतना ही नहीं, सुरक्षा के लिए तैनात दो पुलिसकर्मी भी मर्यादा भूलकर मंच पर कलाकारों के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते कैमरे में कैद हुए हैं। रक्षकों की इस शर्मनाक करतूत ने पुलिस विभाग की छवि को भी गहरा धक्का पहुँचाया है।
लाखों का खेल और टिकटों की बिक्री: सुनियोजित था पूरा आयोजन
यह आयोजन कोई सामान्य ग्रामीण मेला नहीं था, बल्कि इसे एक व्यावसायिक अश्लील शो के रूप में तैयार किया गया था। जानकारी के मुताबिक, ओडिशा से आए इस ऑर्केस्ट्रा को प्रतिदिन 1.20 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा था। इसके अलावा, अश्लील नृत्य करने वाली विशेष डांसर्स को 60 हजार रुपये प्रतिदिन की भारी भरकम फीस पर बुलाया गया था। इस कार्यक्रम को देखने के लिए 200 से 400 रुपये तक के टिकट बेचे गए थे। 8 और 9 जनवरी को जब भीड़ बेकाबू थी, तब प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी वीआईपी सीटों पर बैठकर इस फूहड़ता का आनंद ले रहे थे।
जांच रिपोर्ट के बाद कड़ा एक्शन: जनप्रतिनिधियों पर भी उठ रहे सवाल
9 जनवरी की रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक चले इस अश्लील शो में केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि कई जनप्रतिनिधि और रसूखदार लोग भी शामिल थे। भीड़ के बीच लड़कियों पर पैसे उड़ाना और उनके साथ अभद्रता करना आम बात हो गई थी। कमिश्नर द्वारा की गई जांच में इन सभी तथ्यों की पुष्टि हुई, जिसके बाद कड़ी कार्रवाई की गई है। छत्तीसगढ़ प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा ऐसी अनैतिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल पुलिस उन अन्य लोगों की भी पहचान कर रही है जो इस आयोजन में शामिल होकर अश्लीलता को संरक्षण दे रहे थे।
















