Gariaband Obscene Dance: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर खुलेआम अश्लीलता परोसी गई। उरमाल गाँव में आयोजित इस कार्यक्रम में नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अश्लील डांस का आयोजन किया गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और अब तक कुल 14 आयोजकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोट उड़ाते नजर आए एसडीएम: प्रशासनिक गरिमा हुई तार-तार
इस पूरे विवाद का सबसे चौंकाने वाला पहलू मैनपुर एसडीएम की संलिप्तता रही। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में खुद एसडीएम डांसरों पर नोट उड़ाते हुए और फूहड़ता का आनंद लेते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। विडंबना यह है कि इस कार्यक्रम की अनुमति भी उन्हीं के कार्यालय द्वारा दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से एसडीएम को कार्यमुक्त कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया गया है।
कानून का डंडा: 14 आयोजकों की गिरफ्तारी और कोर्ट में पेशी
पुलिस ने शांति भंग करने और सार्वजनिक स्थल पर अश्लीलता फैलाने की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की है। गिरफ्तार किए गए लोगों में देवेंद्र राजपूत, गोविंद देवांगन, नरेंद्र साहू, हसन खान, हरदयाल नागेश, मुकेश अग्रवाल, और लाल कृष्ण कश्यप समेत 14 नाम शामिल हैं। इन सभी आरोपियों को देवभोग एसडीएम कोर्ट में पेश किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
खाकी पर भी गिरी गाज: तीन पुलिसकर्मी निलंबित
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में रही। अश्लीलता को रोकने में विफल रहने और लापरवाही बरतने के आरोप में एसपी बीएस उइके ने तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय जाँच शुरू कर दी गई है और उन्हें जिला मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है। पुलिस विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई अन्य कर्मियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।
उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन और नया कार्यभार
गरियाबंद कलेक्टर ने पूरे प्रकरण की गहराई से जाँच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित की है। इस टीम में तहसीलदार अमलीपदर और देवभोग थाना प्रभारी को भी शामिल किया गया है। जाँच टीम को जल्द से जल्द संयुक्त रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक शून्यता को भरने के लिए देवभोग एसडीएम राम सिंह सोरी को मैनपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, ताकि क्षेत्र की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।
सामाजिक आक्रोश और कानून व्यवस्था पर सख्त रुख
9 जनवरी को हुए इस कार्यक्रम ने स्थानीय संस्कृति और मर्यादा को गहरी चोट पहुँचाई है। पुलिस अधीक्षक बीएस उइके ने कहा कि, “कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।” मामले में चार मुख्य आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और प्रशासन अब ऐसे आयोजनों की अनुमति देने की प्रक्रिया को और सख्त बनाने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
















