Israel Hamas Crisis
गाजा पट्टी में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। बुधवार को इजरायली सेना द्वारा किए गए भीषण हवाई और जमीनी हमलों ने गाजा के विभिन्न इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 24 लोगों की जान चली गई। इस ताजा हिंसा की सबसे हृदयविदारक बात यह है कि मरने वालों में दो नवजात शिशु, पांच बच्चे और सात महिलाएं शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय 10 अक्टूबर से लागू संघर्षविराम (Ceasefire) को बचाने की कोशिश कर रहा है। गाजा के स्थानीय निवासियों का कहना है कि कागजों पर युद्धविराम होने के बावजूद, जमीनी हकीकत में गोलाबारी और डर का माहौल कभी खत्म ही नहीं हुआ।
बुधवार तड़के गाजा शहर के अल-तुफ्फाह इलाके में हुआ हवाई हमला इस युद्ध की विभीषिका को बयां करता है। इस हमले में खब्बाज परिवार के 11 लोग एक झटके में खत्म हो गए। मृतकों में 10 दिन की वतीन और पांच महीने की मीरा जैसी मासूम बच्चियां शामिल थीं, जिन्होंने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था। शिफा अस्पताल के बाहर अपनों को खोने वाले परिजनों की चीखें किसी का भी कलेजा चीरने के लिए काफी थीं। बेगुनाह बच्चों और उनकी बूढ़ी दादी की मौत पर शोक संतप्त परिजन इजरायली सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने अपने आधिकारिक बयान में इस हमले को आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई बताया है। इजरायल का कहना है कि उन्होंने उन तीन प्रमुख उग्रवादी नेताओं को निशाना बनाया है, जो इजरायली सैनिकों के लिए सीधा खतरा बने हुए थे। सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई हमास द्वारा किए गए उस हमले के जवाब में थी जिसमें एक इजरायली जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था। इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए हमास और इस्लामिक जिहाद के कमांडरों को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में लागू हुआ संघर्षविराम केवल एक छलावा साबित हो रहा है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, शांति की इस तथाकथित अवधि के दौरान अब तक 556 फिलिस्तीनी नागरिकों की जान जा चुकी है। वहीं, इजरायल का कहना है कि इस दौरान उसके भी चार सैनिक मारे गए हैं। संघर्षविराम की शर्तों का लगातार उल्लंघन होने से गाजा के पुनर्निर्माण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अधर में लटके हुए हैं। खान यूनिस से लेकर अल-शाती शरणार्थी शिविर तक, हर जगह विस्थापितों के टेंटों पर होते हमले मानवीय संकट को गहरा रहे हैं।
गाजा में न केवल बमबारी, बल्कि बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव भी लोगों की जान ले रहा है। राफा सीमा पर सख्त पाबंदियों के कारण गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज के लिए मिस्र नहीं ले जाया जा पा रहा है। हालांकि, पूर्व में कुछ बंधकों और कैदियों की अदला-बदली जैसे सकारात्मक कदम उठाए गए थे, लेकिन वर्तमान हिंसा ने उन सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया है। अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस महाविनाश में अब तक 71,800 से अधिक फिलिस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं, जो इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है।
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