Gaza Vacuum Bomb Update
Gaza Vacuum Bomb Update: इजराइल पर गाजा पट्टी में अत्यंत विनाशकारी ‘वैक्यूम बम’ (Vacuum Bomb) के उपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। ‘द रेस्ट ऑफ द स्टोरी’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन बमों की कार्यप्रणाली साधारण विस्फोटकों से बिल्कुल भिन्न और कहीं अधिक खौफनाक है। ये हथियार फटने से पहले हवा में ईंधन का एक विशाल बादल फैलाते हैं और फिर उसमें विस्फोट कर आग का एक प्रचंड गोला तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में आसपास की पूरी ऑक्सीजन खिंच जाती है, जिससे एक शून्य (वैक्यूम) पैदा होता है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये ‘थर्मोबैरिक’ बम कंक्रीट के ढांचों के भीतर छिपे लोगों के लिए काल साबित होते हैं, क्योंकि इनका दबाव और गर्मी किसी भी रक्षा कवच को भेदने में सक्षम है।
इन विस्फोटों की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धमाके के वक्त तापमान $3,500$ डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। एल्यूमिनियम और मैग्नीशियम जैसे तत्वों से लैस ये बम कुछ ही सेकंड में मानव शरीर को वाष्पीकृत या पूरी तरह राख कर देते हैं। गाजा की सिविल डिफेंस टीम ने दिल दहला देने वाला रिकॉर्ड दर्ज किया है, जिसके मुताबिक लगभग 2,842 ऐसे फिलिस्तीनी हैं जिनका अंतिम संस्कार करने के लिए शरीर का एक हिस्सा तक नहीं बचा। रिपोर्ट के अनुसार, 3,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसे हथियारों के उपयोग को स्पष्ट रूप से ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में रखा है।
कहने को तो गाजा में वर्तमान में औपचारिक सीजफायर (युद्धविराम) लागू है, जो अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है, लेकिन जमीन पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अक्टूबर 2025 से अब तक समझौते के बावजूद 500 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है। अल जजीरा की रिपोर्ट में यासमीन महानी नामक एक माँ की दर्दनाक कहानी साझा की गई है, जो महीनों से अपने बेटे साद की तलाश कर रही है। अल-तबिन स्कूल पर हुए हमले के बाद उसे अपने पति के अवशेष तो मिले, लेकिन बेटे का कोई नामोनिशान नहीं मिला। गाजा के अस्पतालों और मुर्दाघरों में ऐसी हजारों माताएं आज भी अपनों की तलाश में भटक रही हैं। इस युद्ध में अब तक कुल मौतों का आंकड़ा 72,000 को पार कर गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल मुख्य रूप से तीन प्रकार के अत्यधिक शक्तिशाली बमों का उपयोग कर रहा है:
एमके-84 ‘हैमर’: यह करीब 900 किलो का बम है जो भीषण गर्मी और दबाव से शरीर के अंगों को नष्ट कर देता है।
बीएलयू-109 बंकर बस्टर: यह मजबूत कंक्रीट की छतों को फाड़कर अंदर घुसता है और बंद कमरों को आग के गोले में तब्दील कर देता है।
जीबीयू-39: इसे एक सटीक निशाना लगाने वाला ‘ग्लाइड बम’ कहा जाता है, जिसके अवशेष स्कूलों और नागरिक आश्रयों के पास पाए गए हैं।
एक तरफ जहां गाजा में बारूद बरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में कूटनीति की बिसात बिछी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बुधवार को दो घंटे लंबी बंद कमरे में बैठक हुई। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। हालांकि, इस बैठक में कोई अंतिम आधिकारिक फैसला नहीं हुआ, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ जैसी सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला है।
बैठक के दौरान ट्रंप ने गाजा में संघर्ष विराम और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के अपने विजन पर भी चर्चा की। नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि इजराइल ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल में शामिल होने के लिए तैयार है। नेतन्याहू ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की और भविष्य के रोडमैप पर चर्चा की। ट्रंप का मानना है कि मध्य पूर्व में शांति संभव है, बशर्ते ईरान अपनी जिम्मेदारियों को समझे। हालांकि, गाजा में हथियारों के परीक्षण और भारी जनहानि के बीच इन शांति वार्ताओं की सफलता पर अभी भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
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