Gaza war news
Gaza war news: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुए सीजफायर की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। इजरायली सेना ने गाजा पट्टी पर नए सिरे से भीषण हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें कम से कम 13 फिलिस्तीनियों की जान चली गई है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में मरने वालों में एक 13 वर्षीय मासूम बच्चा भी शामिल है। यह हमला उस समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद थी कि ट्रंप के शांति प्रयासों से क्षेत्र में स्थिरता आएगी। मासूमों की मौत ने एक बार फिर मध्य पूर्व में मानवीय संकट को गहरा कर दिया है और शांति बहाली के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
इजरायली रक्षा बलों का दावा है कि उनकी यह कार्रवाई हमास की उकसावे वाली गतिविधियों का परिणाम है। इजरायल के मुताबिक, हमास ने गाजा से इजरायली सीमा की ओर मिसाइल दागने का प्रयास किया था, हालांकि वह हमला नाकाम रहा। इसके जवाब में इजरायली वायुसेना ने हमास के ठिकानों को निशाना बनाया। गौरतलब है कि तीन महीने पहले ही दोनों पक्ष ट्रंप की 20-सूत्रीय शर्तों के तहत संघर्ष विराम पर सहमत हुए थे। लेकिन वर्तमान हिंसक झड़पों ने उस समझौते को हाशिए पर धकेल दिया है। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, जबकि फिलिस्तीनी पक्ष इसे अकारण आक्रामकता बता रहा है।
इजरायल और गाजा के बीच फिर से भड़की हिंसा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। ट्रंप अगले सप्ताह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) नामक एक सलाहकार समिति के सदस्यों के नामों की घोषणा करने वाले हैं। इस समिति का मुख्य कार्य पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा करना है। ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह बोर्ड इजरायल और फिलिस्तीन के बीच के विवादों को सुलझाने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत और ताजा हमलों ने इस शांति प्रक्रिया की सफलता पर संदेह पैदा कर दिया है।
इजरायल अब केवल सैन्य हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भौगोलिक बदलावों के जरिए फिलिस्तीन के अस्तित्व को मिटाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इजरायल ने ‘ग्रेटर येरुशलम’ योजना के तहत येरुशलम में नई बस्तियां बसाने का फैसला किया है। यदि यह प्रोजेक्ट लागू होता है, तो इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्र ‘मा’ले अदुमिम’ और ‘ईस्ट येरुशलम’ भौगोलिक रूप से आपस में जुड़ जाएंगे। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि वेस्ट बैंक में स्थित फिलिस्तीनी बस्तियां दो अलग-अलग हिस्सों में कट जाएंगी, जिससे फिलिस्तीनियों का आपसी संपर्क और विकास पूरी तरह बाधित हो जाएगा।
इजरायल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच, जो अपने कट्टर दक्षिणपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं, इस प्रोजेक्ट के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं। अगस्त में इजरायली सरकार से इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद स्मोट्रिच ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र बनने की कोई भी संभावना शेष नहीं रहेगी। फिलिस्तीनी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। इजरायल की यह नीति न केवल शांति समझौतों की धज्जियां उड़ा रही है, बल्कि भविष्य में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की नींव भी रख रही है।
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