Nepal Gen-Z protest: नेपाल में चल रहा Gen-Z आंदोलन अब हिंसक और जानलेवा मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने मंगलवार रात भयावह रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर में आग लगा दी। आगजनी की इस घटना में उनकी पत्नी राजलक्ष्मी खनल गंभीर रूप से झुलस गईं, जिनकी आज इलाज के दौरान मौत हो गई।
नेपाल में चल रहा यह Gen-Z आंदोलन युवाओं के नेतृत्व वाला एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विरोध है, जो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों की गिरावट के खिलाफ खड़ा हुआ है। खासकर युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोश लगातार बढ़ रहा है, जो अब हिंसा में तब्दील हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा मंगलवार रात पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनल के निजी आवास पर फूटा। काठमांडू के प्रतिष्ठित इलाके में स्थित उनके घर पर भीड़ ने पेट्रोल बम फेंके और तोड़फोड़ की। आग की चपेट में आने से उनकी पत्नी राजलक्ष्मी खनल गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन आज सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
राजधानी काठमांडू से लेकर पोखरा और बिराटनगर तक आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतों, नेताओं के घरों और वाहनों को निशाना बना रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें भी सामने आई हैं, जिनमें अब तक दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। वे सत्ता में बैठे नेताओं को “पुराने सोच वाले” करार दे रहे हैं। यही वजह है कि अब आंदोलन का गुस्सा विपक्षी नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों तक भी पहुंच चुका है।
राजलक्ष्मी खनल की मृत्यु से पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक दलों ने जहां घटना की निंदा की है, वहीं कई नेताओं ने सरकार से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक नेतृत्व की विफलता और युवा पीढ़ी के टूटते भरोसे के कारण यह आंदोलन और भी उग्र हो सकता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो यह संकट नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
नेपाल में शुरू हुआ Gen-Z प्रोटेस्ट अब सिर्फ आंदोलन नहीं रहा, बल्कि यह एक सामाजिक उबाल और राजनीतिक अस्थिरता का प्रतीक बन चुका है। राजलक्ष्मी खनल की मौत से यह स्पष्ट हो गया है कि अगर सरकार और राजनीतिक दल समय रहते समाधान नहीं निकालते, तो यह आंदोलन देश को गहरे संकट में डाल सकता है।
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