Gold Investment Record
Gold Investment Record: भारत में सोने को लेकर लोगों का नजरिया तेजी से बदल रहा है। अब लोग सोने को केवल पहनने के लिए गहनों के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य के लिए एक बेहतरीन निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं। केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारत की कुल सोने की खपत का लगभग 40% हिस्सा निवेश के उद्देश्य से खरीदा गया। यह आंकड़ा पिछले कई दशकों के उच्चतम स्तर पर है, जो दर्शाता है कि भारतीय निवेशक अब पारंपरिक आभूषणों के बजाय गोल्ड ईटीएफ (ETF) और सिक्कों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस साल निवेश की मांग में सबसे बड़ी भूमिका गोल्ड ईटीएफ (ETF) की रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में अकेले ETF के माध्यम से 37.5 टन सोने का निवेश किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह निवेश पिछले 10 वर्षों में हुए कुल संचयी निवेश से भी अधिक है। वैश्विक स्तर पर भी यही रुझान देखने को मिला है, जहाँ गोल्ड ETF होल्डिंग्स में 801 मीट्रिक टन की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। 2024 में जहां ETF की हिस्सेदारी लगभग नगण्य थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर कुल खपत का 16% हो गई है।
सोने की आसमान छूती कीमतों ने ज्वेलरी बाजार को प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर गहनों की हिस्सेदारी 19% गिरकर मात्र 33% रह गई है। भारत में भी पारंपरिक रूप से ज्वेलरी की खपत 70% के औसत पर रहती थी, जो अब गिरकर 60% से नीचे आ गई है। हालांकि, मूल्य के हिसाब से ज्वेलरी पर होने वाला खर्च 10% बढ़ा है, लेकिन वजन (वॉल्यूम) के मामले में इसमें 15% की कमी देखी गई है। अब लोग भारी गहनों के बजाय कम कैरेट या हल्के वजन वाले ‘डेली वियर’ आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं।
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सोने की ओर धकेला है। केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर अखिल गोयल के अनुसार, पोर्टफोलियो विविधीकरण की आवश्यकता की वजह से निवेश की यह मांग वित्त वर्ष 2027 तक 35-40% के उच्च स्तर पर बनी रहने का अनुमान है। केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक भी लगातार चौथे साल अपने सोने के भंडार में इजाफा कर रहे हैं, जो कीमतों को सहारा दे रहा है।
भले ही लोग वजन के हिसाब से कम सोना खरीद रहे हों, लेकिन संगठित ज्वेलरी रिटेलर्स के लिए राजस्व के मोर्चे पर अच्छी खबर है। केयरएज रेटिंग्स के असिस्टेंट डायरेक्टर रौनक मोदी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में संगठित रिटेलर्स के राजस्व में 35% से अधिक की वृद्धि हो सकती है। इसका मुख्य कारण असंगठित क्षेत्र का संगठित होना (फॉर्मलाइजेशन) और ब्रांडेड ज्वेलरी स्टोरों का तेजी से विस्तार होना है। हालांकि, 2027 तक यह वृद्धि सामान्य होकर 20-25% के स्तर पर स्थिर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 तक सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास ही बनी रहेंगी। हालांकि बाजार में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन दीर्घकालिक रुझान मजबूती का ही है। भारत में निवेश की हिस्सेदारी 2024 के 29% से बढ़कर 2025 में 42% होना इस बात का प्रमाण है कि सोना अब केवल एक सजावटी धातु नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
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