Gold Price Prediction
Gold Price Prediction : साल 2025 समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन सराफा बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ने के बजाय और तेज होती जा रही है। इस वर्ष सोने की कीमतों ने जो रफ्तार पकड़ी है, उसने निवेशकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव अब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छू चुका है। आंकड़ों की तुलना करें तो साल की शुरुआत में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 83,680 रुपये थी, जिसमें अब तक 70 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यह साल सोने के निवेश के इतिहास में अब तक का सबसे सफल और रिकॉर्ड-तोड़ साल साबित हो रहा है।
जैसे-जैसे नया साल करीब आ रहा है, बाजार के जानकारों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने सोने को लेकर अपनी भविष्यवाणियां साझा करना शुरू कर दिया है। जेपी मॉर्गन (JP Morgan) के विश्लेषकों का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। भारतीय मुद्रा में यह भाव लगभग 1,58,485 रुपये प्रति 10 ग्राम बैठता है। वहीं, गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के एक सर्वे के अनुसार, अगले साल कीमतों में 36 प्रतिशत की और तेजी आ सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन अनुमानित कीमतों में भारत में लगने वाला 3 प्रतिशत GST और अन्य स्टैंप ड्यूटी शामिल नहीं है, यानी आम खरीदार के लिए यह और भी महंगा हो सकता है।
सोने की कीमतों में इस भारी उछाल की सबसे प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) है। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तीन वर्षों से जारी युद्ध का कोई स्थायी समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। इसके अलावा, वेनेजुएला से कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका और अफ्रीका में ISIS से जुड़े समूहों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। जब भी दुनिया में राजनीतिक या सैन्य अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की ओर रुख करते हैं, जिससे इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।
सोने की तेजी के पीछे एक और बड़ा आर्थिक कारण अमेरिकी सेंट्रल बैंक (US Fed Reserve) की नीतियां हैं। वैश्विक बाजार को यह उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले साल ब्याज दरों में कम से कम दो बार कटौती कर सकता है। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बॉन्ड जैसे साधनों पर मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। ऐसे में निवेशक अपने फंड को सोने में स्थानांतरित करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि दुनिया भर में गोल्ड ETF (Exchange Traded Funds) में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
कीमतों में इजाफे का एक अन्य कारण विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने के भंडार (Gold Reserves) को बढ़ाना है। अस्थिर आर्थिक माहौल में अपनी करेंसी को मजबूती देने के लिए चीन, भारत और कई अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भारी मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहे हैं। जब केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं, तो बाजार में इसकी उपलब्धता कम हो जाती है और मांग बढ़ने के कारण कीमतें आसमान छूने लगती हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि आने वाले समय में सोना मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से और दूर हो सकता है।
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