Gold Silver Price Crash: शुक्रवार को भारतीय सर्राफा बाजार में हलचल मच गई और कीमती धातुओं की कीमतों में ऐसी गिरावट देखी गई, जिसने निवेशकों के होश उड़ा दिए। बीते कई महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट के साथ वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों ही धड़ाम हो गए। चांदी की कीमतों में करीब 17% की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी 9% तक लुढ़क गया। वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली ने कीमती धातुओं की चमक फीकी कर दी है।
चांदी के भाव में 17% का महाक्रैश: अब तक की सबसे बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को चांदी की कीमतों में कोहराम मच गया। मार्च डिलीवरी वाली चांदी 67,891 रुपये यानी 16.97% टूटकर 3,32,002 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही चांदी ने 4.20 लाख रुपये का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, लेकिन शुक्रवार की गिरावट ने इसे कई महीनों के निचले स्तर पर धकेल दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही दिन में चांदी में इतनी बड़ी गिरावट इससे पहले कभी नहीं देखी गई।
सोने की कीमतों में 9% की गिरावट: निवेशकों को लगा बड़ा झटका
सोने के वायदा बाजार में भी स्थिति चांदी जैसी ही रही। MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 15,246 रुपये या 9% गिरकर 1,54,157 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। गुरुवार को सोना 1,80,779 रुपये के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा था, लेकिन उच्च स्तरों पर टिकने में नाकाम रहा। बिकवाली के जबरदस्त दबाव के चलते सोने की कीमतें एक ही झटके में काफी नीचे आ गईं, जिससे उन निवेशकों को भारी नुकसान हुआ जिन्होंने उच्च स्तरों पर खरीदारी की थी।
बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण: क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार, शुक्रवार को सोना और चांदी के सभी कॉन्ट्रैक्ट्स में ‘लोअर सर्किट’ लग गया। उन्होंने बताया कि कीमतों में आई इस भारी गिरावट के पीछे ‘मुनाफावसूली’ (Profit Booking) सबसे बड़ा कारण रही। इसके अलावा, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में गिरावट वायदा बाजार की तुलना में और भी अधिक रही, जहाँ गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की कीमतों में 20% तक की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हलचल और मजबूत डॉलर का असर
अमेरिकी बाजार में हो रही गतिविधियों ने भारतीय बाजारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। ऐसी अटकलें हैं कि केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन बनाया जा सकता है। वार्श को मौद्रिक नीति के लिहाज से बेहद सख्त (हॉकीश) माना जाता है। उनके आने की संभावना से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.33% बढ़कर 96.60 पर पहुँच गया। मजबूत डॉलर अक्सर सोने और चांदी की कीमतों के लिए नकारात्मक साबित होता है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं के लिए सुरक्षित निवेश वाली धातुएं महंगी हो जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मची तबाही: कॉमेक्स पर भारी बिकवाली
भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) में भी कीमती धातुओं की चमक गायब रही। मार्च डिलीवरी वाली चांदी 16.87% गिरकर 95.12 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर तक आ गई, जबकि एक दिन पहले इसने 121 डॉलर का स्तर छुआ था। इसी तरह, अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 7.32% टूटकर 4,962.7 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक बाजार में आई इस कमजोरी ने घरेलू बाजार में गिरावट की आग में घी डालने का काम किया।
भविष्य की राह: क्या और गिरेंगे दाम?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक डॉलर में मजबूती बनी रहेगी, तब तक सोना-चांदी की कीमतों में रिकवरी की संभावना कम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेड चेयरमैन के उत्तराधिकारी की आधिकारिक घोषणा के बाद बाजार की दिशा और भी स्पष्ट होगी। फिलहाल, बाजार में अस्थिरता का माहौल है और निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सावधानी के साथ ही कोई नया निवेश करें।
















