Gold Silver Price Today: भारतीय वायदा बाजार (MCX) में शुक्रवार, 27 मार्च 2026 की सुबह सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर चमक लौटती दिखाई दी। वैश्विक बाजार में डॉलर की नरमी का सीधा लाभ कीमती धातुओं को मिला है। शुक्रवार सुबह सोना लगभग 1% की तेजी के साथ ₹1,43,829 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी ने सोने के मुकाबले अधिक रफ्तार पकड़ी और करीब 2% के उछाल के साथ ₹2,23,978 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती देखी गई। पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद यह सुधार निवेशकों के लिए थोड़ी राहत लेकर आया है, जो बाजार की अस्थिरता से चिंतित थे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख: कॉमेक्स पर कीमती धातुओं में दिखी रिकवरी
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं के भाव में सुधार का रुझान देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (COMEX) पर सोना 0.33% की बढ़त के साथ $1,923 प्रति औंस पर पहुंच गया है। इसी तरह चांदी भी 0.29% की तेजी दर्ज करते हुए $24.13 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले सत्र में आई भारी बिकवाली के बाद तकनीकी रूप से यह सुधार अपेक्षित था। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, जिससे लंबी अवधि के निवेशक अभी भी ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रहे हैं।
ट्रंप के फैसले से मिली राहत: ईरान युद्ध और बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार में आई इस ताजा रिकवरी के पीछे एक बड़ा राजनीतिक कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान माना जा रहा है। ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की समयसीमा को 10 दिन आगे बढ़ाने के फैसले ने युद्ध के तत्काल खतरे को थोड़ा टाल दिया है। इस फैसले से वैश्विक निवेशकों में थोड़ा भरोसा लौटा है और उन्होंने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में फिर से खरीदारी शुरू कर दी है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछले एक महीने से जारी ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण सोने की कीमतों में अब तक लगभग 17% की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
ब्याज दरों और मुद्रास्फीति का दबाव: केंद्रीय बैंकों की सख्त नीति
सोने और चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भी गहरा असर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। चूंकि सोना और चांदी निवेश के ऐसे साधन हैं जिन पर कोई निश्चित ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऊंची ब्याज दरें इन धातुओं की अपील को कम कर देती हैं। निवेशकों का झुकाव बॉन्ड यील्ड और डॉलर की ओर बढ़ने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
डॉलर इंडेक्स और तुर्की के बैंक का प्रभाव: क्यों बढ़ी सोने की मुश्किलें?
डॉलर इंडेक्स वर्तमान में 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास मजबूती से टिका हुआ है। मजबूत डॉलर का मतलब है कि अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है। इसके अलावा, तुर्की के सेंट्रल बैंक द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की बिक्री ने भी वैश्विक कीमतों को नीचे धकेला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संघर्ष के शुरुआती दो सप्ताह के भीतर ही तुर्की ने लगभग 60 टन सोना बाजार में बेच दिया, जिससे आपूर्ति बढ़ गई और कीमतों में गिरावट आई।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह: शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों तक सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। हालांकि चांदी को औद्योगिक मांग (Industrial Demand) से कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन सोने के लिए राह अभी चुनौतीपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, “अल्पकालिक (Short Term) अवधि में हल्की रिकवरी संभव है, लेकिन मजबूत अमेरिकी डॉलर के रहते कीमतों का अपने पुराने उच्चतम स्तर को पार करना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।” निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी बड़े निवेश से पहले भू-राजनीतिक खबरों और डॉलर की चाल पर पैनी नजर रखें।


















