Middle East Conflict
Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा भीषण सैन्य संघर्ष अब केवल तेहरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। इस युद्ध का ‘आर्थिक लावा’ अब पड़ोसी खाड़ी देशों की समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं को भी झुलसाने लगा है। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की ताजा रिपोर्ट और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश, जो इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, उन्हें अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय आघात सहना पड़ा है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण इन देशों के व्यापारिक मार्ग और सुरक्षा तंत्र पर गहरा दबाव बना हुआ है, जिससे इनकी विकास दर पर ब्रेक लग गया है।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस जंग के कारण अब तक सऊदी अरब को 5 बिलियन डॉलर (लगभग 415 अरब रुपये) से अधिक का नुकसान हो चुका है। ठीक इसी तरह, संयुक्त अरब अमीरात को भी करीब 5 बिलियन डॉलर की चपत लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्थिक चोट मुख्य रूप से ऊर्जा निर्यात और पर्यटन राजस्व में आई भारी गिरावट का परिणाम है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों का निर्यात पूरी तरह बाधित है। अकेले ऊर्जा क्षेत्र में खाड़ी देशों को अब तक 15.1 बिलियन डॉलर का सामूहिक नुकसान हुआ है।
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ (Aramco) इस युद्ध की सबसे बड़ी शिकार बनी है। जंग के कारण कंपनी का परिचालन लगभग ठप पड़ा है, जिससे सऊदी अरब को अकेले ऊर्जा क्षेत्र में 4.5 बिलियन डॉलर का घाटा उठाना पड़ा है। होर्मुज मार्ग के बंद होने से कुवैत और यूएई के टैंकर भी समुद्र में फंसे हुए हैं। इस रुकावट ने न केवल इन देशों के खजाने को खाली किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। यदि यह नाकेबंदी अधिक समय तक जारी रही, तो खाड़ी देशों का संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Fund) भी प्रभावित हो सकता है।
युद्ध की आग ने खाड़ी देशों के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र ‘पर्यटन’ को भी अपनी चपेट में ले लिया है। असुरक्षा के डर और उड़ानों के रद्द होने के कारण पर्यटकों ने इन देशों से दूरी बना ली है। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई को पर्यटन क्षेत्र में $2.5$ बिलियन डॉलर की हानि हुई है, जबकि सऊदी अरब को $2$ बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। होटल, विमानन और खुदरा व्यापार (Retail) इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कतर जैसे देशों में भी विदेशी मेहमानों की संख्या में भारी कमी आई है, जिससे वहां की सर्विस इंडस्ट्री संकट के दौर से गुजर रही है।
आर्थिक नुकसान के अलावा, इस संघर्ष ने मानवीय घाव भी दिए हैं। युद्ध में शामिल न होने के बावजूद यूएई में 12, कुवैत में 8, और सऊदी अरब व बहरीन में 2-2 नागरिकों की जान जा चुकी है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र से बाहर इराक में सबसे अधिक 59 नागरिक मारे गए हैं। दूसरी ओर, पेंटागन के अनुमान के अनुसार, अमेरिका इस जंग के शुरुआती 10 दिनों में ही 11 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद फूंक चुका है। इस अभियान में अयातुल्ला अली खामेनेई सहित ईरान के $40$ शीर्ष कमांडरों को खत्म करने का दावा किया गया है, लेकिन इसकी कीमत पूरा क्षेत्र चुका रहा है।
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