H-1B Visa Row : H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार के फैसले से भड़के असदुद्दीन ओवैसी, ‘हाउडी मोदी’ से क्या मिला?

H-1B Visa Row : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा में बदलाव को लेकर एक कार्यकारी आदेश जारी करने के बाद भारत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे आयोजनों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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‘हाउडी मोदी’ से क्या मिला? ओवैसी का तीखा सवाल

ओवैसी ने शनिवार (20 सितंबर 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका द्वारा H-1B वीजा में बदलाव भारतीयों को टारगेट करने के लिए किया गया है, और यह भारत के साथ अमेरिका के वास्तविक रिश्तों को उजागर करता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप जैसे इवेंट्स से देश को क्या हासिल हुआ?” उन्होंने कहा, “मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हजारों प्रवासी भारतीयों को इकट्ठा करने का क्या फायदा हुआ, जब अमेरिका हमें रणनीतिक साझेदार मानने से ही इनकार कर रहा है?”

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‘विदेश नीति को नौटंकी बना दिया गया है’

ओवैसी ने आगे कहा कि सरकार की विदेश नीति सिर्फ दिखावे तक सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि “जन्मदिन की शुभकामनाएं विदेश नीति की उपलब्धि नहीं होतीं। अमेरिका का भारत के प्रति यह रवैया दर्शाता है कि उसे भारत की रणनीतिक अहमियत की कोई परवाह नहीं है।”

उन्होंने केंद्र सरकार को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि भारत वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ रहा है और इसके लिए सरकार की कूटनीतिक विफलता जिम्मेदार है।

अमेरिका के कदमों से क्यों परेशान हैं ओवैसी?

AIMIM प्रमुख ने ट्रंप सरकार के इन फैसलों की कड़ी आलोचना की:

H-1B वीजा में बदलाव: इससे लाखों भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स प्रभावित हो सकते हैं।

उच्च टैरिफ: अमेरिका द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाया गया है।

पाकिस्तान-सऊदी समझौता: ओवैसी ने दावा किया कि यह अमेरिका की सहमति के बिना संभव नहीं हो सकता।

भारत की कमजोर स्थिति: उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक मंच पर पहले जैसी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहा।

‘2014 से 2024 तक खोया हुआ दशक रहा’

ओवैसी ने मोदी सरकार के पहले दो कार्यकालों को “खोया हुआ दशक” करार दिया। उन्होंने कहा कि “भारत ने कई देशों के साथ रुपये में व्यापार समझौते किए हैं, लेकिन इनका विस्तार नहीं हो पाया।” उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि “हमें ट्रंप के दबाव में आने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह सोचने की जरूरत है कि हमारी विदेश नीति इतनी कमजोर क्यों हो गई है?”

असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान मोदी सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाता है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका द्वारा लिए गए फैसले भारतीय पेशेवरों और आईटी सेक्टर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकते हैं। ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे हाई-प्रोफाइल कार्यक्रमों की आलोचना कर ओवैसी ने यह संकेत दिया है कि विदेश नीति केवल इवेंट मैनेजमेंट से नहीं चल सकती – इसके लिए ठोस रणनीति और दीर्घकालिक दृष्टिकोण जरूरी है।

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