H-1B Visa Fee
H-1B Visa Fee: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीज़ा की फीस एक लाख डॉलर (लगभग ₹83 लाख) करने की विवादास्पद नीति को लेकर प्रशासन के लिए बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के 19 राज्यों के अटॉर्नी जनरलों ने मिलकर इस नई वीज़ा पॉलिसी को चुनौती देते हुए संघीय अदालत में एक मुकदमा दायर किया है। जिन प्रमुख राज्यों ने यह केस दर्ज किया है, उनमें ओरेगॉन, एरिजोना, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, कनेक्टिकट, हवाई, इलिनोइस, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, मिशिगन, मिनेसोटा, नॉर्थ कैरोलिना, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन शामिल हैं।
ओरेगॉन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने मीडिया को इस कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी और वीज़ा फीस बढ़ाने के इस फैसले को ‘हानिकारक’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भारी वृद्धि के कारण पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में डॉक्टरों, रिसर्चर्स, नर्सों और टीचर्स जैसे उच्च-प्रशिक्षित विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने में गंभीर कठिनाई आएगी। रेफील्ड ने कहा कि कॉलेज, यूनिवर्सिटी और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स अपने लैब वर्क और विभिन्न कोर्स के लिए दूसरे देशों से आने वाले अनुभवी लोगों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन यह बढ़ी हुई फीस उनकी नियुक्ति करना लगभग असंभव बना देगी।
रेफील्ड ने इस बात पर जोर दिया कि यह फीस वृद्धि उच्च शिक्षा संस्थानों पर किस तरह का गहरा नकारात्मक प्रभाव डालेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी 150 से अधिक H-1B वीज़ा धारक कर्मचारियों को स्पॉन्सर करती है, जबकि ओरेगॉन नेशनल यूनिवर्सिटी 50 से अधिक वीज़ा होल्डर्स को प्रायोजित करती है। दोनों संस्थान महत्वपूर्ण और विशेषज्ञ पदों को भरने के लिए इस वीज़ा कार्यक्रम पर बहुत अधिक निर्भर हैं। रेफील्ड ने चेतावनी दी कि फीस बढ़ने से ये पद खाली रह जाने का गंभीर खतरा है, जिससे एजुकेशन, रिसर्च और सार्वजनिक सेवा के उद्देश्यों को भारी नुकसान पहुंचेगा।
दायर की गई याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा लागू की गई यह नई वीज़ा पॉलिसी संघीय कानून का उल्लंघन करती है। याचिका के अनुसार, यह नीति प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम (APA) के तहत मिले अधिकार का उल्लंघन करती है। यह पॉलिसी गृह सुरक्षा सचिव को यह मनमाना अधिकार देती है कि वे यह तय करें कि किन वीज़ा आवेदकों को फीस देनी होगी और किन्हें इससे छूट मिलेगी। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह अधिकार संघीय कानून की भावना के विरुद्ध है। राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 सितंबर को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत नए H-1B वीज़ा आवेदनों के लिए अब 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया था।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह नई फीस केवल उन व्यक्तियों या कंपनियों पर लागू होगी जो 21 सितंबर 2025 के बाद नए H-1B आवेदन दाखिल करते हैं या H-1B लॉटरी में भाग लेते हैं। वर्तमान वीज़ा धारकों और 21 सितंबर से पहले जमा किए गए आवेदकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, आवेदन के साथ $100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क जमा करना अनिवार्य है। याचिका में इस नई फीस को इसकी सामान्य लागत से कहीं ज्यादा बताया गया है। सामान्य H-1B वीज़ा आवेदन शुल्क $960 अमेरिकी डॉलर से लेकर $7,595 अमेरिकी डॉलर तक होता है, जो $100,000 की नई फीस के सामने कई गुना कम है। राज्यों का मानना है कि यह अत्यधिक फीस न केवल अवैध है, बल्कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचाएगी।
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