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Epstein Files: एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर हरदीप पुरी की सफाई, व्यक्तिगत संबंध से इनकार

Epstein Files:  इन दिनों वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में ‘एपस्टीन फाइल्स’ ने एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। इस लिस्ट में यूरोप और अमेरिका के कई प्रभावशाली नेताओं और दिग्गज कारोबारियों के चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। भारत में भी इस मुद्दे पर तब राजनीति गर्मा गई, जब केंद्रीय मंत्री और पूर्व राजनयिक हरदीप सिंह पुरी का नाम इन दस्तावेजों में देखा गया। विपक्षी दलों, विशेषकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पर कड़े सवाल उठाए, जिसके बाद हरदीप पुरी ने स्वयं सामने आकर इस पूरे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

अंतरराष्ट्रीय मंच और एपस्टीन से मुलाकात का संदर्भ

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बताया कि एपस्टीन फाइल्स में उनके नाम का जिक्र किन परिस्थितियों में हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मुलाकातें उस समय हुई थीं जब वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, ‘इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म’ (ICM) के महासचिव के रूप में कार्यरत थे। इस कमीशन में दुनिया भर के कई पूर्व प्रधानमंत्री और प्रतिष्ठित वैश्विक नेता शामिल थे। पुरी ने साफ किया कि जेफरी एपस्टीन उस कमीशन का आधिकारिक हिस्सा नहीं था, बल्कि आईजीआई (IPI) के विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के सिलसिले में वहां मौजूद रहता था।

राजनयिक मर्यादा और मुलाकात की प्रकृति

हरदीप पुरी ने बताया कि उनकी मुलाकातें व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि हमेशा एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल (Delegation) के साथ हुई थीं। उन्होंने कहा, “अगर मैं उस समय कोई सरकारी पद पर होता, तो शायद प्रोटोकॉल के तहत किसी से सलाह लेता, लेकिन तब मैं एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के लिए काम कर रहा था।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यूयॉर्क में अपने आठ साल के लंबे कार्यकाल के दौरान वे संभवतः केवल तीन या चार बार ऐसे आयोजनों में शामिल हुए जहाँ एपस्टीन मौजूद था। पुरी ने दोहराया कि ये मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर और औपचारिक थीं।

गूगल सर्च और एपस्टीन के इतिहास पर स्पष्टीकरण

एक निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में हरदीप पुरी ने बताया कि जब उनकी पहली बार एपस्टीन से मुलाकात हुई थी, तब वे उसके विवादित इतिहास के बारे में नहीं जानते थे। उन्होंने साझा किया कि पहली मुलाकात के दौरान उन्होंने और उनके सहयोगियों ने एपस्टीन के बारे में गूगल पर जानकारी खोजी थी और आपसी चर्चा भी की थी कि उनसे मिलना उचित है या नहीं। यह स्पष्ट करता है कि उनके मन में एपस्टीन की गतिविधियों को लेकर सतर्कता थी और वे केवल संस्थागत उद्देश्यों के लिए ही वहां मौजूद थे।

“न मैं कभी उसके आइलैंड पर गया, न वह मेरे घर आया”

विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए हरदीप पुरी ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि एपस्टीन उनका कोई व्यक्तिगत मित्र नहीं था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं न तो कभी उसके कुख्यात आइलैंड पर गया और न ही वह कभी मेरे घर आया।” उन्होंने बताया कि 30 लाख से अधिक ईमेल जारी किए जा चुके हैं और उन दस्तावेजों में कहीं भी उनके किसी अश्लील कृत्य या व्यक्तिगत संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि 2009 से 2017 तक न्यूयॉर्क में रहने के दौरान सार्वजनिक जीवन में कई लोगों से मिलना होता है, जिसका गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

राजनीतिक विवाद और भविष्य की राह

हरदीप पुरी के इस स्पष्टीकरण के बाद भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं थमी नहीं हैं। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष इसे एक अंतरराष्ट्रीय संस्था में काम करने के दौरान हुई सामान्य मुलाकात बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे नैतिकता के तराजू पर तौल रहा है। फिलहाल, पुरी ने अपने सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से साझा करने की बात कही है। इस विवाद ने यह तो साफ कर दिया है कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ की आंच आने वाले समय में कई और वैश्विक हस्तियों तक पहुँच सकती है, लेकिन भारतीय संदर्भ में पुरी ने अपने पक्ष को मजबूती से पेश किया है।

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