Haryana Electricity Employees Strike Ends : हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को खत्म हो गई। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ बातचीत के बाद तत्काल प्रभाव से आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया। हड़ताल खत्म होने के फैसले से बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या का सामना कर रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। संयुक्त कार्य समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली सेवाओं को तुरंत बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री के साथ हुई बातचीत
बिजली कर्मचारियों की मांगों और राज्य के बिजली क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच चर्चा हुई। बातचीत के दौरान कर्मचारियों ने निजीकरण को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। आंदोलन वापस लेने की घोषणा के साथ ही बिजली सेवाओं को सामान्य करने पर जोर दिया गया। हालांकि, लंबित मुद्दों पर अंतिम समाधान के लिए आगे भी बातचीत जारी रहेगी।
निजी कंपनियों की एंट्री पर सरकार से मिला आश्वासन
कर्मचारी प्रतिनिधियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य के बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों को आने नहीं दिया जाएगा। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने का आश्वासन दिया गया है। निजीकरण की आशंका बिजली कर्मचारियों के आंदोलन का प्रमुख मुद्दा थी। कर्मचारी संगठनों का कहना था कि बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी से जुड़े प्रस्तावों को लेकर उन्हें चिंता थी। फिलहाल, सरकार से मिले आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला किया है।
लंबित मांगों पर 3 नवंबर को अगली बैठक
बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच जिन मुद्दों पर सहमति या अंतिम फैसला होना बाकी है, उन पर आगे चर्चा की जाएगी। इसके लिए अगली बैठक 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। इस बैठक में कर्मचारियों की लंबित मांगों और बिजली क्षेत्र से जुड़े विवादित विषयों पर बातचीत होने की उम्मीद है। कर्मचारियों की ओर से बताया गया कि आंदोलन वापस लेने के बावजूद मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रहेगी। अब सभी की नजर अगली बैठक के नतीजों पर रहेगी।
निजीकरण के विरोध में शुरू हुई थी हड़ताल
हरियाणा में बिजली विभाग के कर्मचारी बिजली क्षेत्र के कथित निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर चले गए थे। कर्मचारियों ने कामकाज बंद कर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया था। उनका कहना था कि बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी से जुड़ी योजनाओं पर स्पष्टता और ठोस आश्वासन जरूरी है। इसी मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई थी। सरकार की ओर से हड़ताल खत्म करने की अपील की जा रही थी, लेकिन कर्मचारियों ने मांगों पर भरोसेमंद आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखा।
कई जिलों में बिजली और पानी की सप्लाई प्रभावित
हड़ताल के दौरान हरियाणा के कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आईं। बिजली नहीं मिलने से घरेलू कामकाज प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। इसका असर पानी की सप्लाई पर भी पड़ा, क्योंकि कई स्थानों पर पानी पहुंचाने की व्यवस्था बिजली पर निर्भर रहती है। कुछ इलाकों में लोगों को अंधेरे और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बिजली सेवाओं के बाधित होने से आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई।
हड़ताल खत्म होने के बाद अब बहाली पर नजर
कर्मचारियों की ओर से हड़ताल समाप्त करने की घोषणा के बाद अब बिजली आपूर्ति को सामान्य करने पर ध्यान दिया जाएगा। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि सेवाएं जल्द पूरी तरह बहाल होंगी। दूसरी ओर, कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान अगली बातचीत पर निर्भर करेगा। 3 नवंबर को प्रस्तावित बैठक यह तय करने में अहम हो सकती है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच शेष मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ा जाएगा।
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