Heart Attack Risk
Heart Attack Risk: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और खान-पान की बिगड़ती आदतों के कारण हृदय रोग एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुके हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दिल के दौरे (Heart Attack) और स्ट्रोक के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक शरीर में वसा का अनियंत्रित स्तर है। अक्सर लोग कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसराइड को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन मेडिकल विज्ञान की दृष्टि से ये दोनों अलग-अलग प्रकार के लिपिड्स (वसा) हैं। गुरुग्राम स्थित मैक्स अस्पताल के प्रिंसिपल कंसल्टेंट (कार्डियोलॉजी) डॉ. रोहित गोयल ने इन दोनों के बीच के सूक्ष्म अंतर और हृदय पर इनके पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला है।
ट्रायग्लिसराइड वास्तव में शरीर में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट है, जिसका मुख्य कार्य ऊर्जा प्रदान करना है। जब हम अपनी शारीरिक आवश्यकता से अधिक कैलोरी का सेवन करते हैं, तो हमारा शरीर उन अतिरिक्त कैलोरी को भविष्य में उपयोग के लिए ‘ट्रायग्लिसराइड’ के रूप में जमा कर लेता है। यह मुख्य रूप से उन लोगों में अधिक बढ़ता है जो बहुत अधिक मीठा, मैदा, या तला-भुना भोजन खाते हैं। शारीरिक सक्रियता की कमी, मोटापा और अनियंत्रित डायबिटीज भी इसके स्तर को खतरनाक सीमा तक ले जा सकते हैं। जब खून में ट्रायग्लिसराइड का स्तर बढ़ जाता है, तो रक्त गाढ़ा होने लगता है और धमनियों की दीवारों में सूजन आ सकती है, जो भविष्य में हृदय रोगों की नींव रखती है।
कोलेस्ट्रॉल के बारे में एक आम धारणा यह है कि यह केवल नुकसानदेह होता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के लिए अपरिहार्य है क्योंकि यह नई कोशिकाओं के निर्माण, हार्मोन के संतुलन और विटामिन-D के संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समस्या तब शुरू होती है जब शरीर में ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’ यानी LDL (Low-Density Lipoprotein) की मात्रा बढ़ जाती है। यह LDL धमनियों की दीवारों पर चिपक कर ‘प्लाक’ (कचरा) बनाने लगता है, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है। दूसरी ओर, ‘अच्छा कोलेस्ट्रॉल’ यानी HDL (High-Density Lipoprotein) एक सफाईकर्मी की तरह काम करता है, जो धमनियों से अतिरिक्त वसा को हटाकर लीवर तक पहुँचाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यद्यपि दोनों ही दिल के लिए घातक हो सकते हैं, लेकिन हार्ट अटैक का सबसे सीधा और प्राथमिक खतरा ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ (LDL) से होता है। यह धमनियों में सीधे तौर पर ब्लॉकेज पैदा करता है, जिससे हृदय को रक्त पंप करने के लिए अतिरिक्त जोर लगाना पड़ता है। हालांकि, ट्रायग्लिसराइड की भूमिका को भी कम नहीं आँका जा सकता। यदि किसी व्यक्ति का LDL अधिक है और साथ ही ट्रायग्लिसराइड भी बढ़ा हुआ है, तो हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। यह स्थिति विशेष रूप से उन लोगों के लिए जानलेवा साबित होती है जो पहले से ही मोटापे या मधुमेह (Diabetes) से जूझ रहे हैं।
हृदय को सुरक्षित रखने के लिए केवल दवाएँ पर्याप्त नहीं हैं। डॉक्टर रोहित गोयल का सुझाव है कि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसराइड दोनों को नियंत्रित करने के सबसे प्रभावी तरीके हैं। रिफाइंड शुगर और सैचुरेटेड फैट से परहेज करना चाहिए। अपने आहार में ओमेगा-3 फैटी एसिड, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करने से HDL यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) करवाते रहना चाहिए ताकि समय रहते वसा के स्तर का पता चल सके और दवाओं या परहेज के माध्यम से उसे स्थिर किया जा सके।
अंततः, दिल की सेहत आपकी मुट्ठी में है। कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसराइड का सही संतुलन बनाए रखना दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कुंजी है। यदि आप सीने में भारीपन, सांस फूलना या अत्यधिक थकान महसूस करते हैं, तो इसे सामान्य न समझें और तुरंत किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। याद रखें, हार्ट अटैक अचानक आ सकता है, लेकिन इसके लक्षण और कारण शरीर में सालों पहले से पनप रहे होते हैं।
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