Beetroot benefits: मानव शरीर के सुचारू संचालन में हीमोग्लोबिन एक अनिवार्य घटक है। यह रक्त में मौजूद वह प्रोटीन है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के प्रत्येक ऊतक और अंग तक पहुँचाने का उत्तरदायित्व निभाता है। जब शरीर में इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को अत्यधिक थकान, चक्कर आना, सांस लेने में कठिनाई और शारीरिक कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एनीमिया के इन लक्षणों से राहत पाने के लिए खान-पान में सुधार प्राथमिक कदम होता है, जिसमें चुकंदर को सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचारों में से एक माना जाता है।

क्या वाकई चुकंदर का जूस बढ़ाता है खून? एक्सपर्ट की राय
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या केवल चुकंदर के सेवन से हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार संभव है? पीएसआरआई (PSRI) हॉस्पिटल के वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय के अनुसार, चुकंदर पोषक तत्वों का पावरहाउस है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, फोलेट, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। हीमोग्लोबिन के संश्लेषण के लिए आयरन सबसे बुनियादी तत्व है, जबकि फोलेट (विटामिन B9) लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण में उत्प्रेरक का कार्य करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए, तो यह रक्त की कमी को दूर करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।
चुकंदर का जूस पीने का सबसे सटीक समय और तरीका
किसी भी सुपरफूड का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उसके सेवन का सही समय जानना आवश्यक है। चुकंदर के जूस का सेवन यदि सुबह खाली पेट किया जाए, तो शरीर इसके पोषक तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित (Absorb) कर पाता है। हालांकि, यदि किसी को खाली पेट जूस पीने से भारीपन महसूस होता है, तो वे नाश्ते के लगभग एक घंटे बाद इसका सेवन कर सकते हैं। एक विशेष टिप यह है कि जूस में नींबू का रस अवश्य मिलाएं; नींबू में मौजूद विटामिन-C आयरन के अवशोषण की प्रक्रिया को तेज कर देता है, जिससे एनीमिया से जल्दी रिकवरी होती है।
कितनी मात्रा में करें सेवन: ‘अति’ से बचें
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही संयम पर जोर देते हैं। हीमोग्लोबिन बढ़ाने के उत्साह में अत्यधिक जूस पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क के लिए प्रतिदिन 150 से 200 मिलीलीटर चुकंदर का जूस पर्याप्त है। इससे अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन संबंधी विकार जैसे गैस, एसिडिटी या अचानक ब्लड प्रेशर कम होने की समस्या हो सकती है। याद रखें कि प्राकृतिक उपचार धीरे-धीरे और निरंतरता के साथ काम करते हैं।
परिणाम दिखने में कितना समय लगता है?
रक्त की कमी एक रात में पूरी नहीं होती। हीमोग्लोबिन के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने के लिए कम से कम 3 से 4 सप्ताह तक नियमित रूप से चुकंदर के जूस का सेवन करना चाहिए। लगभग एक महीने के निरंतर सेवन के बाद ब्लड रिपोर्ट में सकारात्मक बदलाव दिखने शुरू हो जाते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि यदि एनीमिया गंभीर स्थिति (Severe Anemia) में है, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा परामर्शित आयरन सप्लीमेंट्स और दवाओं का सेवन प्राथमिक होना चाहिए।
सावधानी और किन परिस्थितियों में बचें
चुकंदर का जूस हर किसी के लिए एक समान फायदेमंद नहीं होता। कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी बरतनी जरूरी है:
किडनी स्टोन: चुकंदर में ऑक्सालेट की मात्रा अधिक होती है, जो पथरी की समस्या को बढ़ा सकती है।
लो ब्लड प्रेशर: इसमें मौजूद नाइट्रेट्स बीपी को कम करते हैं, इसलिए निम्न रक्तचाप वाले लोग सतर्क रहें।
मधुमेह (Diabetes): चुकंदर में प्राकृतिक शर्करा होती है, अतः शुगर के मरीज डॉक्टर की सलाह पर ही इसे लें।
गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को इसकी मात्रा और अवधि के लिए विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

















