Himanta Biswa Sarma
Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की बदलती जनसांख्यिकी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए हिंदू समाज के लिए एक नया आह्वान किया है। बारपेटा जिले में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में समुदायों के बीच जन्म दर का अंतर भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदू जोड़ों को अब ‘एक बच्चा’ नीति से आगे बढ़कर कम से कम दो या तीन बच्चे पैदा करने चाहिए, ताकि समाज में संतुलन बना रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में जन्म दर (Birth Rate) काफी अधिक बनी हुई है। उन्होंने चिंता जताई कि जहां एक ओर मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, वहीं हिंदुओं की जन्म दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उनके अनुसार, यह फासला राज्य के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को भी सुझाव दिया कि वे 7-8 बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति को छोड़ें, क्योंकि अत्यधिक आबादी संसाधनों पर दबाव डालती है।
हिमंत बिस्वा सरमा ने हिंदू परिवारों को संबोधित करते हुए एक भावनात्मक और व्यावहारिक तर्क दिया। उन्होंने कहा, “मेरा सुझाव है कि आपको एक बच्चे पर नहीं रुकना चाहिए। कम से कम दो और संभव हो तो तीन बच्चे पैदा करें।” इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि यदि हिंदू अपनी जन्म दर में सुधार नहीं करेंगे, तो भविष्य में उनके परिवारों की देखभाल करने वाला और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं बचेगा। उनके इस बयान को राज्य की सांस्कृतिक पहचान बचाने की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
असम सरकार इस मुद्दे पर केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतिगत स्तर पर भी बदलाव कर रही है। हाल ही में 5 दिसंबर को राज्य कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), चाय बागान श्रमिकों, मोरन और मटक समुदायों के लिए ‘दो बच्चों के नियम’ में ढील दी है। सरकार का लक्ष्य इन विशिष्ट समुदायों की जनसंख्या को प्रोत्साहित करना है ताकि राज्य का जनसांख्यिकीय संतुलन बना रहे। पूरे राज्य में नई फैमिली प्लानिंग पॉलिसी को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी चल रही है।
मुख्यमंत्री ने 2011 की जनगणना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय असम की कुल 3.12 करोड़ की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 61.47% (1.92 करोड़) थी, जबकि मुस्लिम आबादी 34.22% (1.07 करोड़) थी। मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि जिस गति से बदलाव आ रहा है, उसके अनुसार 2027 तक राज्य में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़कर 40% तक पहुंच सकता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि समय रहते जन्म दर में सुधार नहीं किया गया, तो राज्य के कई हिस्सों में हिंदू अल्पसंख्यक हो सकते हैं।
लेख के अंत में यह स्पष्ट होता है कि हिमंत बिस्वा सरमा का यह संदेश केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे हिंदुओं की सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि घटती जन्म दर न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करेगी, बल्कि पारिवारिक संरचना को भी कमजोर कर देगी। सरकार की ढील और मुख्यमंत्री के इन कड़े बयानों ने राज्य में जनसंख्या नीति पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे आने वाले समय में असम की राजनीति और सामाजिक दिशा तय होने की उम्मीद है।
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