Himanta Biswa Sarma
Himanta Biswa Sarma : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि उनका बाल बांका करने या उन्हें जेल भेजने का ख्वाब देखने वाले कांग्रेस नेताओं को इसके लिए नया जन्म लेना होगा। सरमा ने गांधी परिवार को चुनौती देते हुए कहा कि मुझे गिरफ्तार करने के लिए इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और खुद राहुल गांधी को दोबारा जन्म लेकर आना पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस जन्म में तो कांग्रेस के लिए यह संभव नहीं है, बल्कि सात जन्मों के बाद भी वे हिमंत बिस्वा सरमा का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। यह बयान उस समय आया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं।
मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘छोटा पप्पू’ करार दिया। जब पत्रकारों ने उनसे गौरव गोगोई द्वारा उन्हें जेल भेजने के दावे पर सवाल पूछा, तो सरमा ने मजाकिया अंदाज में कहा, “देखिए, राहुल गांधी का मतलब ‘पप्पू’ है और अब लोग गौरव गोगोई को ‘छोटा पप्पू’ मानने लगे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जो लोग खुद अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वे दूसरों को जेल भेजने की धमकियां दे रहे हैं। सरमा के इस बयान ने असम की राजनीति में भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत हमलों के एक नए दौर को जन्म दे दिया है।
इस पूरे विवाद की जड़ असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर जारी राजनीतिक रस्साकशी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में गुवाहाटी और असम के विभिन्न क्षेत्रों में रैलियों के दौरान मुख्यमंत्री सरमा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने हिमंत बिस्वा सरमा को देश का “सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री” बताते हुए आरोप लगाया कि वे दिल्ली के इशारे पर असम में “लैंड एटीएम” (Land ATM) चला रहे हैं। राहुल का दावा है कि मुख्यमंत्री आम जनता की जमीनें छीनकर बड़े कॉर्पोरेट घरानों को सौंप रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की सरकार आते ही सरमा को जेल जाना होगा और तब मोदी-शाह भी उन्हें नहीं बचा पाएंगे।
राहुल गांधी के जेल भेजने वाले बयान पर पलटवार करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने उनकी कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए। सरमा ने कहा कि जो व्यक्ति (राहुल गांधी) खुद नेशनल हेराल्ड मामले सहित कई अन्य कानूनी मामलों में जमानत (Bail) पर बाहर है, वह दूसरों को जेल भेजने की धमकी कैसे दे सकता है? उन्होंने इसे कांग्रेस की हताशा का प्रतीक बताया। गौरतलब है कि सरमा पहले कांग्रेस का ही हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व उन्हें ‘धोखा देने वाला’ मानता है, जबकि सरमा इसे अपनी राजनीतिक स्वाधीनता और असम के विकास का रास्ता बताते हैं।
असम में 2026 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। एक तरफ राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा और जनसभाओं के जरिए कांग्रेस की खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी के अभेद्य किले को और मजबूत करने में जुटे हैं। भ्रष्टाचार, गिरफ्तारी और निजी हमलों के इस दौर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाला चुनाव केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत साख और वर्चस्व की लड़ाई पर भी लड़ा जाएगा। दोनों दलों के बीच यह तनाव आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है।
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