अपराध

Honor Killing Maharashtra : महाराष्ट्र के नांदेड़ में ऑनर किलिंग, प्रेम संबंध के चलते विवाहिता और प्रेमी को कुएं में फेंका

Honor Killing Maharashtra : महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जो ऑनर किलिंग (इज़्ज़त के नाम पर हत्या) की क्रूर मानसिकता को उजागर करता है। बोरजुन्नी गांव में एक शादीशुदा महिला और उसके प्रेमी को कथित तौर पर परिवारवालों ने रंगेहाथ पकड़ लिया और फिर उन्हें बेरहमी से पीटने के बाद कुएं में फेंक दिया।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के मुताबिक, यह घटना सोमवार (25 अगस्त 2025) की है, जब महिला का प्रेमी, जो बोरजुन्नी गांव का निवासी बताया जा रहा है, गोलेगांव में महिला से मिलने गया था। दोनों को एक साथ देखकर महिला के परिजनों ने उन्हें पकड़ लिया और महिला के मायके वालों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद महिला और उसके प्रेमी को वापसी के रास्ते में बेरहमी से पीटा गया। पीटाई के बाद, उनके हाथ-पांव बांधकर उन्हें कुएं में फेंक दिया गया।

महिला का शव मिला, प्रेमी लापता

घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। महिला का शव कुएं से बरामद कर लिया गया है, लेकिन उसके प्रेमी की अब तक तलाश जारी है। गोताखोरों और रेस्क्यू टीम की मदद से खोज अभियान चलाया जा रहा है।

परिजन हिरासत में, ऑनर किलिंग का शक

पुलिस ने बताया कि महिला के पिता, दादा और चाचा को हिरासत में ले लिया गया है। प्राथमिक जांच में मामला ऑनर किलिंग का प्रतीत हो रहा है, जहां समाजिक शर्म और प्रतिष्ठा के नाम पर अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया गया।

सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल

यह घटना न केवल कानून व्यवस्था, बल्कि समाज की मानसिकता पर भी सवाल खड़े करती है। एक ओर जहां देश महिला सशक्तिकरण, समानता और स्वतंत्रता की बात करता है, वहीं दूसरी ओर प्रेम संबंधों को लेकर की जा रही हत्याएं यह दिखाती हैं कि समाज का एक बड़ा हिस्सा आज भी पिछड़ी सोच से ग्रस्त है।

कानून की नजर में ऑनर किलिंग

भारत में ऑनर किलिंग को लेकर कोई अलग कानून नहीं है, लेकिन भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत हत्या (धारा 302), आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120B) और गंभीर हमले (धारा 307) जैसी धाराओं में कार्रवाई की जाती है। सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर ऑनर किलिंग को लेकर कड़े निर्देश दे चुका है।

नांदेड़ की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि इंसानियत और रिश्तों की हत्या है। प्रेम करने की स्वतंत्रता हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, और इसे कुचलने वाले किसी भी समाज को प्रगतिशील नहीं कहा जा सकता। ज़रूरत है, न केवल सख्त कानून की, बल्कि समाज में सोच बदलने की भी।

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