Hooded Pitohui
Hooded Pitohui: आसमान में ऊँची उड़ान भरते और पेड़ों पर चहचहाते पक्षी अमूमन सुंदरता, शांति और आज़ादी के प्रतीक माने जाते हैं। जब भी जहरीले जीवों की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सांप, बिच्छू या मकड़ियों की तस्वीर उभरती है। लेकिन विज्ञान की दुनिया ने हाल ही में एक ऐसी खोज की है जिसने पक्षियों को लेकर हमारी पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पक्षी की पहचान की है जो इतना जहरीला है कि उसे छूना भी खतरे से खाली नहीं है। न्यू गिनी के जंगलों में पाया जाने वाला ‘हुडेड पिटोहुई’ (Hooded Pitohui) दुनिया का सबसे जहरीला पक्षी घोषित किया गया है।
हुडेड पिटोहुई देखने में बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन इसकी यही खूबसूरती एक चेतावनी है। इस पक्षी को पहचानना बहुत आसान है; इसका धड़ चमकीले नारंगी रंग का होता है, जबकि सिर, पंख और पूंछ गहरे काले रंग के होते हैं। जीव विज्ञान में इस तरह के ‘कंट्रास्ट’ रंगों को ‘अपोसेमेटिज्म’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है शिकारियों को यह चेतावनी देना कि यह जीव खाने योग्य नहीं है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने इस पक्षी के नमूनों को बिना सुरक्षा के छुआ, उन्हें त्वचा में जलन और अंगों के सुन्न होने (numbness) जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।
वैज्ञानिक इस बात से सबसे ज्यादा हैरान हैं कि इस पक्षी में वही जहर पाया जाता है जो दक्षिण अमेरिका के कुख्यात ‘पॉइजन डार्ट’ मेंढकों में होता है। इस जहर को ‘बैट्राचोटॉक्सिन’ (Batrachotoxin) समूह में रखा जाता है। यह एक शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन है जो तंत्रिका तंत्र पर सीधा हमला करता है। हालांकि, हुडेड पिटोहुई में इसकी मात्रा एक मेंढक की तुलना में कम होती है, फिर भी यह इंसानों के शरीर में झनझनाहट और सुन्नपन पैदा करने के लिए पर्याप्त है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह जहर पक्षी के मांस में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से उसकी त्वचा और पंखों पर केंद्रित होता है।
हुडेड पिटोहुई कोई ‘वेनम’ (venom) बनाने वाला जीव नहीं है, यानी यह सांपों की तरह डसकर जहर नहीं छोड़ता। दरअसल, यह जहर इसके भोजन से आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पक्षी जंगल में रहने वाले खास तरह के ‘सॉफ्ट-विंग्ड फ्लावर बीटल्स’ (Melyrid beetles) को खाता है। इन कीड़ों में बैट्राचोटॉक्सिन जैसे रासायनिक यौगिक होते हैं। जब पक्षी इन्हें खाता है, तो ये रसायन उसके शरीर में जमा होकर पंखों और त्वचा तक पहुँच जाते हैं। यही वजह है कि एक ही प्रकार के कीड़े खाने के कारण अलग-अलग प्रजाति के जीवों (पक्षी और मेंढक) में एक जैसा जहर मिलता है।
सवाल यह उठता है कि अगर यह पक्षी जहर का इस्तेमाल शिकार करने के लिए नहीं करता, तो इसके पास यह जहर क्यों है? वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जहर हुडेड पिटोहुई के लिए एक सुरक्षा कवच (Defence Mechanism) की तरह काम करता है। जहर की उपस्थिति के कारण इसका मांस अत्यंत बेस्वाद और कड़वा हो जाता है, जिससे बाज या सांप जैसे शिकारी इससे दूर रहते हैं। इसके अलावा, जहरीले पंख पक्षी को जूं, पिस्सू और अन्य हानिकारक परजीवियों (parasites) से भी बचाते हैं, क्योंकि वे इस जहरीली सतह पर जीवित नहीं रह सकते।
हुडेड पिटोहुई की खोज ने यह साबित कर दिया है कि प्रकृति ने खुद को बचाने के लिए हर जीव को अलग-अलग हथियार दिए हैं। जहां अन्य पक्षी उड़ान भरकर अपनी जान बचाते हैं, वहीं पिटोहुई ने रासायनिक युद्ध की कला सीखी है। हालांकि यह पक्षी इंसानों के लिए जानलेवा नहीं माना जाता (जब तक कि इसे खाया न जाए), लेकिन इसकी त्वचा का जहर एक बड़ा सबक है कि हर सुंदर दिखने वाली चीज को छूना सुरक्षित नहीं होता। वैज्ञानिकों के लिए यह पक्षी आज भी शोध का एक रोमांचक विषय बना हुआ है।
Read More: Saturday Remedies 2025: साल 2025 के आखिरी शनिवार पर करें ये उपाय, चमकेगी किस्मत
Indian Ocean Tension: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण संघर्ष अब सीमाओं को लांघकर…
Iran Tourism Threat: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब केवल सीमाओं…
UK Entry in Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक नया और…
Trump Iran Announcement: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति…
Mathura Crime : उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक हृदयविदारक और आक्रोश पैदा करने वाली…
iPhone Flight Tracker: अगर आप अक्सर हवाई यात्रा करते हैं या अपने किसी प्रियजन के…
This website uses cookies.