Strait of Hormuz news
Strait of Hormuz news : अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान अब उस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने पर सहमत हो गया है, जहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यह समुद्री मार्ग पूरी तरह बाधित था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। हालांकि, 40 दिनों की लंबी जंग के बाद ईरान इसे खोलने तो जा रहा है, लेकिन एक ऐसी शर्त के साथ जो शिपिंग कंपनियों की जेब पर भारी पड़ने वाली है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स और फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर तेल टैंकर से ‘टोल’ वसूलने की योजना बना रहा है। ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स एक्सपोर्टर्स यूनियन के प्रवक्ता हामिद होसैनी ने स्पष्ट किया कि ईरान इस मार्ग से होने वाली हर आवाजाही पर अपना कड़ा नियंत्रण रखना चाहता है। उनका तर्क है कि सीजफायर के इन दो हफ्तों के दौरान ईरान को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस रास्ते का इस्तेमाल गुप्त रूप से हथियारों की तस्करी के लिए न किया जाए। इसी सुरक्षा और निगरानी के नाम पर अब हर जहाज की गहन जांच की जाएगी।
ईरान ने टोल वसूली के लिए तकनीक का सहारा लेते हुए एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। यह टोल किसी देश की मुद्रा के बजाय ‘क्रिप्टोकरंसी’ (Cryptocurrency) में लिया जाएगा। होसैनी के मुताबिक, जैसे ही कोई टैंकर इस मार्ग का उपयोग करेगा, उसे ईमेल के जरिए अपने माल की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके तुरंत बाद ईरान उन्हें बिटकॉइन में भुगतान करने के लिए कुछ ही सेकंड का समय देगा। इस डिजिटल मुद्रा के इस्तेमाल के पीछे ईरान का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचना है, ताकि वित्तीय लेन-देन को ट्रैक या जब्त न किया जा सके।
ईरान ने टोल की दरें भी लगभग तय कर ली हैं। योजना के मुताबिक, हर एक बैरल कच्चे तेल पर 1 डॉलर का टोल लगाया जाएगा। एक औसत तेल टैंकर में लाखों बैरल तेल होता है, ऐसे में यह राशि करोड़ों डॉलर तक पहुँच सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि खाली टैंकरों को बिना किसी शुल्क या रोक-टोक के वहां से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन तेल से लदे जहाजों के लिए अब यह समुद्री रास्ता पहले के मुकाबले काफी महंगा साबित होने वाला है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन और शर्तों से जुड़ा हर बड़ा फैसला ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ लेती है। रिपोर्टों के अनुसार, काउंसिल अब यह अनिवार्य कर सकती है कि हर टैंकर ईरान के तट के पास वाले उत्तरी मार्ग का ही इस्तेमाल करे। इससे ईरान के लिए हर जहाज की भौतिक जांच करना और उन पर नजर रखना आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर के दौरान ईरान इस समुद्री मार्ग को एक कूटनीतिक और आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यदि यह टोल सिस्टम लागू होता है, तो वैश्विक ऊर्जा व्यापार में एक नया और विवादित अध्याय शुरू हो जाएगा।
GT vs DC IPL 2026 : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन में बुधवार…
Adhir Ranjan Chowdhury : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए जारी धुआंधार प्रचार के बीच…
Middle East War : अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के सीजफायर (संघर्ष…
Avimukteshwaranand : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जान से मारने की धमकी…
US-Iran War : मिडिल ईस्ट में 40 दिनों तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद,…
Jagdalpur Tower Drama : छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब…
This website uses cookies.