Cholesterol Control: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान ने कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या को घर-घर तक पहुँचा दिया है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल दो रूपों में पाया जाता है: एचडीएल (HDL), जिसे ‘अच्छा’ कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, और एलडीएल (LDL), जिसे ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों में जमा होने लगता है, जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है। शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. भानु मिश्रा के अनुसार, समय रहते इसके कारणों को समझना और जीवनशैली में बदलाव करना हृदय स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।

गलत खानपान: खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह
बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने के पीछे सबसे प्रमुख कारण हमारा आहार है। आजकल लोग स्वाद के चक्कर में अधिक तला-भुना भोजन, फास्ट फूड और बेकरी आइटम्स का सेवन करते हैं। रेड मीट, मक्खन, और ट्रांस फैट से भरपूर प्रोसेस्ड फूड नसों में वसा को जमा करने का काम करते हैं। ये खाद्य पदार्थ लिवर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं और रक्त में वसा के स्तर को अनियंत्रित कर देते हैं। यदि आप अपने आहार में सुधार नहीं करते हैं, तो दवाइयां भी सीमित प्रभाव ही दिखा पाती हैं।
शारीरिक सक्रियता का अभाव: सुस्त जीवनशैली के दुष्परिणाम
शारीरिक गतिविधियों की कमी कोलेस्ट्रॉल असंतुलन का दूसरा बड़ा कारण है। ऑफिस में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना और व्यायाम से दूरी बनाना शरीर में फैट जमा करने में मदद करता है। जब हम सक्रिय नहीं रहते, तो हमारा शरीर भोजन से प्राप्त ऊर्जा का उपभोग नहीं कर पाता, जो अंततः खराब कोलेस्ट्रॉल के रूप में जमा होने लगता है। नियमित रूप से चलने-फिरने या कसरत करने से शरीर में ‘अच्छे’ कोलेस्ट्रॉल (HDL) की मात्रा बढ़ती है, जो नसों की सफाई करने में मदद करती है।
तनाव और नींद की कमी: मानसिक स्वास्थ्य का कोलेस्ट्रॉल से संबंध
अक्सर लोग यह नहीं जानते कि अत्यधिक तनाव और नींद की कमी भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकती है। तनाव के दौरान शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन रिलीज होते हैं जो ट्राइग्लिसराइड्स और LDL को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन नसों को सख्त बना देता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल जमना आसान हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग प्रतिदिन 7-8 घंटे की गहरी नींद नहीं लेते, उनमें मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
जेनेटिक फैक्टर: जब आनुवंशिकता बन जाए कोलेस्ट्रॉल की वजह
कुछ मामलों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है। इसके पीछे आनुवंशिक (Genetic) कारण जिम्मेदार होते हैं। यदि आपके परिवार में किसी को उच्च कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग की समस्या रही है, तो आपको यह विरासत में मिल सकती है। यह स्थिति लिवर को रक्त से खराब कोलेस्ट्रॉल साफ करने से रोकती है। ऐसे व्यक्तियों में बहुत कम उम्र से ही नसों में ब्लॉकेज शुरू हो सकती है, इसलिए उन्हें नियमित जांच और चिकित्सकीय परामर्श की अधिक आवश्यकता होती है।
बचाव के अचूक उपाय: डाइट और व्यायाम से पाएँ काबू
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले सैचुरेटेड फैट (घी, मक्खन, फुल क्रीम दूध) का सेवन सीमित करें। अपने आहार में फाइबर युक्त चीजें जैसे ओट्स, बीन्स, दालें, ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल करें। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए मछली, अखरोट और अलसी के बीज का सेवन बेहद फायदेमंद है। खाना पकाने के लिए रिफाइंड तेल के बजाय सीमित मात्रा में कोल्ड-प्रेस्ड हेल्दी ऑयल्स का उपयोग करें। वजन को नियंत्रित रखना और धूम्रपान से पूर्ण दूरी बनाना भी आवश्यक है।
सक्रिय दिनचर्या: योग और प्राणायाम का सहारा
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चलना (Brisk Walking), साइकिल चलाना या तैरना कोलेस्ट्रॉल को कम करने का सबसे आसान तरीका है। मानसिक शांति और तनाव प्रबंधन के लिए योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। ‘अनुलोम-विलोम’ और ‘भ्रामरी’ जैसे प्राणायाम न केवल तनाव कम करते हैं, बल्कि रक्त संचार में भी सुधार लाते हैं।

















