Humayun Kabir
Humayun Kabir Political Party: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित और निलंबित विधायक हुमायूं कबीर आज, 22 दिसंबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी को औपचारिक रूप से लॉन्च करेंगे। अल्पसंख्यक बहुल जिले मुर्शिदाबाद के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कबीर ने घोषणा की है कि उनकी नई पार्टी का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ होगा। उन्होंने दावा किया है कि इस नए सफर में उन्हें जनता का भारी समर्थन प्राप्त है और वे राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को बदलने का माद्दा रखते हैं।
हुमायूं कबीर अपनी नई पार्टी की घोषणा मिर्जापुर से करेंगे, जो बेलडांगा के काफी करीब स्थित है। गौर करने वाली बात यह है कि यह स्थल वही है जहां उनकी तरफ से प्रस्तावित बाबरी मस्जिद का स्थल स्थित है। कबीर ने अपने समर्थकों और विपक्षी दलों को संबोधित करते हुए एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने उन सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील की है जो टीएमसी और बीजेपी दोनों के विरोधी हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार को सत्ता से बेदखल करना है, लेकिन उन्होंने यह भी सतर्क किया कि इस प्रक्रिया में बीजेपी को सत्ता हथियाने का कोई मौका नहीं मिलना चाहिए।
हुमायूं कबीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक संतुलित और सम्मानजनक रुख अपनाया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े नेता हैं और हमें उनका सम्मान करना चाहिए क्योंकि वे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं।” उन्होंने खुद की तुलना पीएम मोदी से किए जाने पर कहा कि वे एक साधारण इंसान हैं और उनकी तुलना प्रधानमंत्री से नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत का जिक्र करते हुए यह भी याद दिलाया कि वे पिछले 43 वर्षों से मुर्शिदाबाद जिले की राजनीति में सक्रिय हैं।
अपनी संगठनात्मक शक्ति का दावा करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि उनके पास लोगों को एकजुट करने का पुराना अनुभव है। उन्होंने बताया कि अतीत में उन्होंने जिला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी विशाल रैलियां की हैं और बरहामपुर में लाखों लोगों की भीड़ इकट्ठा की है। कबीर ने पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब प्रणब मुखर्जी देश के वित्त, रक्षा और विदेश मंत्री थे, तब वे उनकी रैलियों में मंच साझा करते थे। यह उनके राजनीतिक कद और क्षेत्रीय पकड़ को दर्शाने की कोशिश है।
आगामी चुनावों और गठबंधन की रणनीति पर चर्चा करते हुए कबीर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी पार्टी बीजेपी और टीएमसी दोनों के खिलाफ स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। हालांकि, उन्होंने गठबंधन के द्वार खुले रखे हैं। कबीर ने कहा कि बंगाल की अन्य पार्टियां जैसे कांग्रेस, वामपंथी दल और आईएसएफ (ISF), यदि टीएमसी और बीजेपी के खिलाफ लड़ने के लिए उनके साथ आना चाहती हैं, तो वे उनका स्वागत करेंगे। उनका मानना है कि एक साझा मोर्चा ही राज्य में सत्ता परिवर्तन की कुंजी बन सकता है।
हुमायूं कबीर का यह कदम मुर्शिदाबाद और आसपास के इलाकों में टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण के बीच ‘जनता उन्नयन पार्टी’ की भूमिका अहम हो सकती है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता और अन्य विपक्षी दल हुमायूं कबीर के इस नए राजनीतिक विकल्प को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
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