Humayun Kabir BJP Deal
Humayun Kabir BJP Deal : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े राज्य में एक सनसनीखेज वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चेयरमैन हुमायूं कबीर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर भाजपा नेताओं के साथ 1000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम डील पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में कबीर यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे किसी भी कीमत पर ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं। हालांकि, इस वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इसने बंगाल की राजनीति में आरोपों का नया दौर शुरू कर दिया है।
वायरल वीडियो में हुमायूं कबीर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के साथ संपर्क का दावा करते दिख रहे हैं। वीडियो के अनुसार, कबीर ने बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा के साथ बातचीत का संकेत दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो में 200 करोड़ रुपये एडवांस मिलने और रणनीति सफल होने पर उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का भी जिक्र है। यह वीडियो उस समय आया है जब कबीर की पार्टी 118 सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है।
इन गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने इसे पूरी तरह से निराधार और फेक बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का उपयोग करके उन्हें बदनाम करने के लिए बनाया गया है। कबीर ने स्पष्ट किया कि वे कभी भी हिमंता बिस्व सरमा या मोहन यादव से नहीं मिले हैं और न ही उनकी ऐसी कोई बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि वे फिलहाल चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, लेकिन समय मिलते ही इस साजिश के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मामले को हाथों-हाथ लिया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने हिंदुओं, मुसलमानों और मतुआ समुदाय को भ्रमित करने के लिए एजेयूपी जैसी पार्टियों को अपनी ‘B’ और ‘C’ टीम के रूप में खड़ा किया है। घोष ने सवाल उठाया कि जब वीडियो में 1000 करोड़ रुपये और पीएमओ के अधिकारियों का जिक्र है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? टीएमसी ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
हुमायूं कबीर का विवादों से पुराना नाता रहा है। पिछले साल 6 दिसंबर 2025 को उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतीकात्मक नींव रखकर सुर्खियां बटोरी थीं। उस कार्यक्रम में लाखों की भीड़ जुटी थी, जहां लोग अलग-अलग माध्यमों से ईंटें लेकर पहुंचे थे। अब चुनाव के ठीक पहले 23 और 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग से पहले इस नए वीडियो विवाद ने उनकी राजनीतिक राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बंगाल चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन तब तक यह वीडियो विवाद शांत होता नहीं दिख रहा है।
पैसों के लेन-देन और राजनीतिक सौदेबाजी के इन आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एआई के दुरुपयोग का डर सामने आ रहा है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपों ने मतदाताओं के बीच असमंजस पैदा कर दिया है। अब यह जांच का विषय है कि क्या यह वास्तव में कोई गुप्त डील थी या फिर चुनावी लाभ के लिए रचा गया कोई डिजिटल षड्यंत्र। बंगाल की जनता की निगाहें अब 4 मई के परिणामों और इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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