उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुआ ‘I Love Muhammad’ पोस्टर विवाद अब महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तराखंड समेत कई राज्यों तक फैल चुका है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश मानी जा रही इस घटना ने पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया है। आइए जानते हैं इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।

विवाद की शुरुआत: कानपुर में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर
4 सितंबर को कानपुर से एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक पोस्टर पर साफ लिखा था – “I Love Muhammad”। यह पोस्टर बारावफात जुलूस के दौरान लगाया गया था। बारावफात मुस्लिम समुदाय का धार्मिक पर्व है, जहां पैगंबर मोहम्मद की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है।हालांकि, कानपुर पुलिस का कहना है कि सरकार ने जुलूस में किसी नई परंपरा को अपनाने पर रोक लगाई हुई है, लेकिन इस बार कुछ लोगों ने नई जगह पर टेंट लगाया और साथ ही यह पोस्टर भी लगवा दिया। इस पोस्टर को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ और पुलिस को मामला शांत कराने के लिए बीच-बचाव करना पड़ा।

🚨 Violence erupted yesterday night in Uttarakhand’s Kashipur (Udham Singh Nagar) over the “I Love Mohammad” row.
Stones pelted at police vehicles, objectionable slogans raised, several injured in clashes. Arsonists identified by police. Arrests soon.After Godhra, Navsari &… pic.twitter.com/ngmA9d2EYy
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) September 22, 2025
क्यों बढ़ा विवाद?
मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि उनके साइन बोर्ड को फाड़ दिया गया, जबकि हिंदू पक्ष ने कहा कि मुस्लिम जुलूस में शामिल लोगों ने उनके धार्मिक पोस्टर फाड़े। पुलिस ने जांच के बाद 9 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि FIR पोस्टर लगाने पर नहीं, बल्कि नई परंपरा अपनाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप पर दर्ज हुई है।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं और विवाद का राष्ट्रीय स्तर पर फैलाव
15 सितंबर को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा,”I Love Muhammad कहना जुर्म नहीं है, अगर है तो इसकी हर सजा मंजूर है।”ओवैसी के इस बयान ने विवाद को और हवा दी। इसके बाद सपा समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी मामले पर बयानबाजी की।कानपुर से शुरू हुआ यह मामला अब मुंबई, गुजरात, उत्तराखंड जैसे राज्यों तक पहुंच गया है, जहां कई जगह प्रदर्शन हुए और ‘सिर तन से जुदा’ जैसे नारे लगे। इससे स्पष्ट है कि यह विवाद अब धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला मसला बन गया है।
प्रशासन की भूमिका और स्थिति नियंत्रण में
पुलिस ने मामले को लेकर दोनों पक्षों से समझौता कराया, लेकिन तब तक विवाद बढ़ चुका था। प्रशासन ने साफ किया है कि कोई भी धार्मिक आयोजन या जुलूस परंपरागत नियमों के तहत ही हो। नई परंपराओं को अपनाना कानूनन उचित नहीं माना जाएगा।
‘I Love Muhammad’ पोस्टर विवाद यह दिखाता है कि देश में धार्मिक और सांप्रदायिक संवेदनशीलता कितनी नाजुक है। छोटे विवाद भी अगर सही समय पर और सही तरीके से न सुलझाए जाएं, तो वे बड़े तनाव का रूप ले लेते हैं।ऐसे मामलों में सभी पक्षों से शांति और संयम की अपील जरूरी है, ताकि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को नुकसान न पहुंचे। प्रशासन को चाहिए कि वह समय पर कार्रवाई कर विवाद को बढ़ने से रोके और सभी समुदायों के बीच समरसता बनाए रखे।
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