IAS Deepak Soni
IAS Deepak Soni: छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के प्रतिभाशाली और नवाचारी आईएएस अधिकारी दीपक सोनी एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी कर्तव्यनिष्ठा और विकासपरक कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले दीपक सोनी को अब केंद्र सरकार ने दिल्ली बुलाया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उन्हें ‘डायरेक्टर’ (निदेशक) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया है। केंद्र सरकार के इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया है। यह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पांच वर्षों की अवधि के लिए होगी, जहाँ वे राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में अपनी सेवाएं देंगे।
दीपक सोनी छत्तीसगढ़ के ही मूल निवासी हैं, उनका जन्म और पालन-पोषण दुर्ग जिले में हुआ। एक स्थानीय युवा से लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के शीर्ष पदों तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। वर्तमान में वे बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनसे पहले वे रायपुर, सूरजपुर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव जैसे महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व कर चुके हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक संवेदनशील, सख्त और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
दीपक सोनी का सबसे उल्लेखनीय कार्यकाल नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में रहा। वहां उन्होंने बंदूक की जगह विकास और रोजगार को प्राथमिकता दी। उन्होंने न केवल दुर्गम इलाकों में मोटरसाइकिल से पहुँचकर ग्रामीणों का विश्वास जीता, बल्कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अभिनव प्रयास किए। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को जंगल के भीतर अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उनके ‘दंतेवाड़ा मॉडल’ की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की गई।
दीपक सोनी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ‘डैनेक्स’ (DANNEX) गारमेंट फैक्ट्री की स्थापना शामिल है। ‘दंतेवाड़ा नेक्स्ट’ के नाम से शुरू की गई इस पहल ने आदिवासी महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया। आज इस फैक्ट्री में लगभग 750 गरीब और आदिवासी महिलाएं काम कर रही हैं, जिनमें आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिवार भी शामिल हैं। डैनेक्स अब एक बड़ा ब्रांड बन चुका है, जिसने अब तक 30 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। इस मॉडल ने दिखाया कि कैसे स्थानीय संसाधनों और कौशल के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
दंतेवाड़ा के बाद कोंडागांव और बलौदा बाजार में भी दीपक सोनी ने अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाया। उन्होंने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की और जनसहभागिता को बढ़ावा दिया। हाल ही में उन्हें जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ से भी नवाजा गया था। उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा हिस्सा नवाचार (Innovation) रहा है, जिससे उन्होंने कई जटिल समस्याओं का समाधान निकाला है।
अब केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में उनकी नियुक्ति छत्तीसगढ़ कैडर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीपक सोनी का जमीनी अनुभव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने में बेहद मददगार साबित होगा। उनका यह सफर स्पष्ट करता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो एक संवेदनशील प्रशासक सबसे कठिन भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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